Sunday, September 27, 2026
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PM मोदी के संकेत के बाद बढ़ी टेंशन! क्या भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

Petrol Diesel Price Hike India : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। ईरान-अमेरिका तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर भारत पर भी पड़ने की आशंका है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बनाए हुए है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

तेल कंपनियों को रोजाना हजारों करोड़ का नुकसान

रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां रोजाना करीब 1600 से 1700 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेल रही हैं।

सूत्रों के अनुसार पिछले करीब 10 हफ्तों में इन कंपनियों का कुल घाटा 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां लंबे समय तक यह नुकसान नहीं उठा सकतीं और इसकी भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
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आम जनता पर बढ़ सकती है महंगाई की मार

यदि आने वाले दिनों में ईंधन के दाम बढ़ते हैं तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने की चीजों, घरेलू सामान और रोजमर्रा के खर्चों में भी तेजी आ सकती है।

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है और अब घरेलू एलपीजी सिलेंडर महंगे होने की आशंका भी बढ़ गई है।

PM मोदी ने दिए फ्यूल बचाने के संकेत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और जरूरत पड़ने पर Work From Home जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा बना रहा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।

भारत क्यों ज्यादा प्रभावित हो सकता है?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में तेल और गैस की सप्लाई पर और दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने कीमतों को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।

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