M.P News : कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी, जैव-विविधता को मिलेगा नया जीवन

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। चीता पुनर्स्थापना की सफलता के बाद अब जंगली भैंसों (वाइल्ड बफेलो) की वापसी का अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 28 अप्रैल को बालाघाट जिले के सूपखार और टोपला क्षेत्र में इस परियोजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे।

कान्हा में छोड़े जाएंगे 4 जंगली भैंसे

कार्यक्रम के तहत शुरुआती चरण में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। इनमें 3 मादा और 1 नर भैंसा शामिल है। यह कदम ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाई जा सके।
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काजीरंगा से कान्हा तक ट्रांसलोकेशन

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया जा रहा है। कुल 50 भैंसों को चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में 8 भैंसों का ट्रांसलोकेशन किया जाएगा, जो विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की निगरानी में वैज्ञानिक तरीके से हो रहा है।

वन्यजीव एक्सचेंज से बढ़ेगा सहयोग

इस परियोजना के साथ मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीव आदान-प्रदान का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। असम से दो जोड़े गैंडे भोपाल के वन विहार लाए जाएंगे। इसके बदले में मध्यप्रदेश 3 बाघ और 6 मगरमच्छ असम को भेजेगा। यह समझौता दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई बैठक के बाद तय हुआ।

क्यों जरूरी है यह पुनर्स्थापन?

वन विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की प्राकृतिक आबादी लगभग एक सदी पहले खत्म हो गई थी। अत्यधिक शिकार, मानव हस्तक्षेप और प्राकृतिक आवास के नुकसान इसके मुख्य कारण रहे। वर्तमान में इनकी आबादी मुख्य रूप से असम तक सीमित है, जबकि अन्य राज्यों में यह बेहद कम है।

कान्हा बना सबसे उपयुक्त आवास

भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व जंगली भैंसों के लिए सबसे अनुकूल स्थान है। यहां के विस्तृत घास के मैदान, पर्याप्त जल स्रोत और कम मानव हस्तक्षेप इस प्रजाति के लिए आदर्श वातावरण तैयार करते हैं।

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