निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा दिए गए विवादित बयान के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि संतोष वर्मा को अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) का पदाधिकारी नहीं माना जाता।
सरकार का स्पष्ट फैसला
सामान्य प्रशासन विभाग (कर्मचारी कल्याण) ने जारी आदेश में अजाक्स संगठन की स्थिति स्पष्ट करते हुए चौधरी मुकेश मौर्य को वैधानिक प्रांताध्यक्ष के रूप में मान्यता दी है। इसके साथ ही आईएएस विशेष गढ़पाले को कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष घोषित किया गया है।
प्रांताध्यक्ष पद का विवाद समाप्त
काफी समय से अजाक्स में प्रांताध्यक्ष पद को लेकर विवाद चल रहा था, जिसे अब सरकार के इस फैसले से खत्म माना जा रहा है। आदेश के बाद संगठन में नेतृत्व को लेकर स्थिति साफ हो गई है।
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नए अध्यक्ष का बयान
प्रांताध्यक्ष मुकेश मौर्य और कार्यवाहक अध्यक्ष विशेष गढ़पाले ने जिम्मेदारी संभालने के बाद कहा कि संगठन सभी वर्गों को साथ लेकर काम करेगा। उनका उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के साथ-साथ अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
संतोष वर्मा ने उठाए सवाल
वहीं दूसरी ओर आईएएस संतोष वर्मा ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि किसी संगठन के प्रांताध्यक्ष का चयन करना सरकार या सामान्य प्रशासन विभाग का अधिकार क्षेत्र नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी के पास अपील लंबित है।
आगे क्या होगा?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है। प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर इस पर आगे क्या फैसला आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।











