निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्र सरकार ने इसके गायन और प्रस्तुति से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अब विशेष सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के आधिकारिक छह अंतरों का गायन या वादन अनिवार्य होगा।
छह अंतरों वाला संस्करण ही बजेगा
नए निर्देशों के अनुसार अब कार्यक्रमों में तीन मिनट दस सेकंड की अवधि वाला पूरा संस्करण प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि पहले लगभग 65 सेकंड का संक्षिप्त रूप उपयोग में लिया जाता था। यह प्रावधान राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने, भाषण या राष्ट्र के नाम संबोधन जैसे अवसरों से पहले और बाद में लागू रहेगा।
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स्कूलों में सामूहिक गायन की व्यवस्था
सरकार ने देशभर के स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से करने की सलाह दी है। यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों गाए जाने हों, तो पहले राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाएगा।
साथ ही ‘वंदे मातरम्’ के दौरान उपस्थित सभी लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना आवश्यक होगा, ताकि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और छंदों की वापसी
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में की थी, जिसे बाद में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में प्रकाशित किया गया। मूल रचना में कुल छह छंद थे, जिनमें से 1937 में चार छंद हटाए गए थे।
अब केंद्र सरकार ने पुनः सभी छह छंदों के उपयोग को मान्यता दी है। हालांकि यह नियम सिनेमा हॉल जैसी सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों पर लागू नहीं होगा।











