JPNIC Controversy: अखिलेश यादव पर बरसे CM योगी, 864 करोड़ के खर्च का उठाया सवाल

Rahul Goshwami

CM Yogi Attack on Akhilesh Yadav: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क– उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। देवरिया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने लखनऊ के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर सपा पर कई गंभीर आरोप लगाए।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को देवरिया में 305 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 80 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सपा सरकार के कार्यकाल और JPNIC के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किए। हालांकि, सीएम योगी द्वारा लगाए गए आरोपों पर सपा का पक्ष इस जानकारी में सामने नहीं आया है।

JPNIC के निर्माण को लेकर योगी ने साधा निशाना
सीएम योगी ने आरोप लगाया कि JPNIC की शुरुआती लागत करीब 200 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में इस परियोजना पर लगभग 864 करोड़ रुपये खर्च किए गए और इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि JPNIC को पूरा करने में अब भी 150 से 200 करोड़ रुपये तक और खर्च होने का अनुमान है।मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी क्यों रही। उन्होंने इसे जनता के पैसे से जुड़ा मुद्दा बताते हुए तत्कालीन सरकार पर निशाना साधा।
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‘JPNIC को प्राइवेट कंपनी की तरह चलाने की थी योजना’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि JPNIC को भविष्य में एक निजी कंपनी के जरिए संचालित करने की योजना थी। उन्होंने दावा किया कि इसमें होटल, जिम और क्लब जैसी सुविधाएं शामिल थीं और इससे होने वाली आय एक परिवार तक पहुंचाने की कथित साजिश थी।सीएम ने अपने भाषण में अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव का नाम लेते हुए भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से तैयार होने वाली संपत्ति को निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई।

सपा पर ‘लूट-खसोट’ का आरोप
जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा का मतलब लूट-खसोट और डकैतों का गिरोह है। उन्होंने अपने भाषण में सपा सरकार के पुराने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में भय और असुरक्षा का माहौल होने की बात कही जाती थी।योगी ने दावा किया कि उस समय महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर लोगों में डर का माहौल था। उन्होंने सपा सरकार के दौरान विकास कार्यों, रोजगार, बिजली, सड़क और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए।

अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग
मुख्यमंत्री ने JPNIC और कथित भ्रष्टाचार को लेकर अखिलेश यादव से जनता के सामने माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खजाने से खर्च होने वाला पैसा जनता का है और सरकारों की जिम्मेदारी है कि उसका इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से किया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि सपा सरकार के दौरान कई स्कूल जर्जर हालत में थे और प्रदेश में विकास की स्थिति खराब थी। वहीं मौजूदा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ी है और प्रदेश की छवि में बदलाव आया है।

‘अब एक जिला-एक माफिया नहीं, एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज’
सीएम योगी ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि पहले प्रदेश में माफियाओं की समानांतर सत्ता चलती थी, जबकि अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब ‘एक जिला-एक माफिया’ की जगह ‘एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज’ की दिशा में काम हो रहा है।उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने माफिया पर कार्रवाई के साथ-साथ इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से निपटने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए हैं।

इंसेफेलाइटिस को लेकर भी सपा-कांग्रेस पर हमला
मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस की समस्या का जिक्र करते हुए दावा किया कि करीब 40 वर्षों में इस बीमारी की वजह से 50 हजार मासूमों की मौत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने इस गंभीर समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।योगी ने कहा कि 15 जुलाई से 15 नवंबर के बीच देवरिया, गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और बस्ती समेत कई जिलों में इंसेफेलाइटिस का खतरा बना रहता था। उन्होंने इसे लेकर पूर्ववर्ती सपा और कांग्रेस सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए।फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में JPNIC समेत कई मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी के इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर भी राजनीतिक गलियारों की नजर रहेगी।

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