Friday, August 21, 2026
Home National Delhi Toilets in Courts and Tribunals : अदालतों में शौचालय सुविधाएं नहीं, सुप्रीम...

Toilets in Courts and Tribunals : अदालतों में शौचालय सुविधाएं नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 20 हाई कोर्ट को लगाई फटकार, आठ हफ्ते की डेडलाइन

#nishaanebaz.com
#nishaanebaz.com

Toilets in Courts and Tribunals :  नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश की अदालतों और ट्रिब्यूनल्स में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को गंभीरता से लिया है। अदालत ने बुधवार को नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक 20 उच्च न्यायालयों ने शौचालय सुविधाओं पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, जो कि अदालत के पहले दिए गए आदेश की अवहेलना है। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संबंधित हाई कोर्ट को अंतिम अवसर दिया जा रहा है – अगले आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करें, अन्यथा संबंधित रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

  • “हमने 15 जनवरी को जो आदेश जारी किया था, वह अब तक अधिकांश हाई कोर्ट ने गंभीरता से नहीं लिया।”
  • “हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि यदि आठ सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

सिर्फ 5 हाई कोर्ट ने भेजी रिपोर्ट
अब तक केवल झारखंड, मध्य प्रदेश, कलकत्ता, दिल्ली और पटना उच्च न्यायालय ने ही अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है। देश में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं, जिनमें से 20 ने अब तक कोई जानकारी नहीं दी।

15 जनवरी का आदेश क्या था?
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि: शौचालय सुविधा तक पहुंच संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। हर अदालत परिसर में पुरुष, महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएं। हर हाई कोर्ट को एक कमेटी बनानी होगी, जिसकी अध्यक्षता एक वरिष्ठ जज करेंगे और जिसमें रजिस्ट्रार जनरल, राज्य के मुख्य सचिव, PWD सचिव, वित्त सचिव, और बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस कमेटी को: अदालतों में आने वाले लोगों की संख्या का आकलन करना होगा। पर्याप्त संख्या में शौचालय बनाने और उन्हें नियमित रूप से साफ-सुथरा रखने की योजना बनानी होगी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती क्यों जरूरी?
देश के कई अदालत परिसरों में शौचालय की हालत खस्ताहाल है। वकीलों, महिला वादकारियों और दिव्यांगजनों को अक्सर साफ और सुलभ टॉयलेट्स नहीं मिलते। यह सिर्फ सुविधा का सवाल नहीं, इंसान की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा मसला है।

Share The News
Previous articleअजीबो-गरीब मामला : शराब के नशे में युवक ने निगला जिंदा सांप, अस्पताल में हुआ भर्ती
Next articleMaharashtra News : खौफनाक : चलती बस में जन्मे बच्चे को मां-बाप ने खिड़की से फेंका, मौत…..
VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here