मऊगंज/रीवा, 27 मई — विकास के तमाम दावों के बीच मध्यप्रदेश के मऊगंज से एक शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर गांव से करीब 2 किलोमीटर तक खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक लाया गया, क्योंकि 108 एंबुलेंस तो पहुंची, मगर गांव तक जाने को तैयार नहीं हुई।
घटना मऊगंज के कोन गांव की है, जहां वर्षा साकेत नाम की गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल 108 नंबर पर कॉल किया, लेकिन एंबुलेंस देरी से पहुंची। जब पहुंची, तो ड्राइवर ने गांव में घुसने से साफ इनकार कर दिया। उसका तर्क था – “सड़क नहीं है, गाड़ी नीचे नहीं उतरेगी… ये आपकी समस्या है।”
ऐसे में कोई रास्ता न देख, परिवार और गांववालों ने खुद एंबुलेंस बनते हुए महिला को चारपाई पर लिटाकर लगभग 2 किलोमीटर दूर सड़क तक ढोया, जहां एंबुलेंस खड़ी थी।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वर्षों से गांव में सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक सिर्फ वादे ही मिले हैं। बरसात में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाते — लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि चुप हैं।
यह घटना सिर्फ एक लाचार महिला की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की असफलता है जो बजट भाषणों में ‘विकास’, ‘सड़क’ और ‘स्वास्थ्य’ की बात करता है लेकिन ज़मीनी हकीकत में लोगों को खाट पर सफर करने पर मजबूर करता है।











