दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन में बीते कुछ महीनों से ट्रांसफर और पोस्टिंग का सिलसिला सुर्खियों में है। लेकिन इस बार मामला सिर्फ तबादलों का नहीं, बल्कि नियमों और नैतिकता की सीमाओं को लांघते हुए कुछ संदिग्ध चेहरों को अहम पदों तक पहुंचाने का है।
सूत्रों के मुताबिक, एक ऐसे आरपीएफ इंस्पेक्टर, जिस पर गांजा तस्करों से साठगांठ का आरोप लग चुका है और जिसे इसी कारण बिलासपुर से हटाकर नागपुर भेजा गया था, उसे अब CIB (Crime Intelligence Branch) में स्क्रिनिंग टेस्ट पास कराकर एक महत्वपूर्ण पद देने की तैयारी की जा रही है।
सवाल उठता है कि विभाग के पास ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि संदिग्ध छवि वाले अफसर को न सिर्फ क्लीन चिट दी जा रही है, बल्कि उसे जोन के सबसे संवेदनशील पदों में से एक पर बैठाने का रास्ता भी साफ किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि स्क्रिनिंग रिपोर्ट में इस इंस्पेक्टर के विवादित अतीत का ज़िक्र ‘नोट’ के रूप में दर्ज जरूर किया गया, परंतु उसे रोका नहीं गया।
इधर रायपुर के सेटलमेंट पोस्ट को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। यहां एक सब इंस्पेक्टर को प्रमोशन के साथ पोस्टिंग दी जा रही है, जिसकी पहचान विभाग में ‘सेवादार अफसर’ के रूप में होती है – यानी जो अधिकारीगण के निजी कार्यों, प्रोटोकॉल और सेवा-भाव में सदा तत्पर रहता है।
बिलासपुर, रायपुर और नागपुर में कई अनुभवी इंस्पेक्टरों को ऑफिस वर्क तक सीमित रखा गया है, जबकि चुने हुए चेहरे ही फील्ड की कमान संभाल रहे हैं। इस ट्रांसफर-पोस्टिंग की अदृश्य रणनीति को लेकर विभाग के भीतर चुप्पी का माहौल है – जहां हर कोई सब कुछ जानते हुए भी मुंह में पट्टी और आंखों पर पट्टी बांधे हुए है।
यदि डीआईजी स्तर पर इन तबादलों और पोस्टिंग की निष्पक्ष जांच होती है, तो रेलवे सुरक्षा बल में चल रही अंदरूनी राजनीति और संभावित मिलीभगत के कई परतें खुल सकती हैं।











