भारत में मोबाइल कनेक्शनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर नया कनेक्शन किसी व्यक्ति के स्मार्टफोन में इस्तेमाल हो रहा है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के अगस्त 2026 के आंकड़े बताते हैं कि इस बढ़ोतरी में मशीन-टू-मशीन यानी M2M कनेक्शनों और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस की भी अहम भूमिका है। इन तकनीकों के जरिए गाड़ियों, स्मार्ट मीटर और इंटरनेट से जुड़े दूसरे उपकरणों को भी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।
क्या होते हैं M2M सिम कनेक्शन?
आमतौर पर सिम कार्ड का नाम सुनते ही मोबाइल फोन का ख्याल आता है। लेकिन M2M सिम ऐसे उपकरणों में लगाए जाते हैं, जिन्हें आपस में जानकारी साझा करने या नेटवर्क से जुड़े रहने के लिए इंटरनेट कनेक्शन चाहिए। इनमें स्मार्ट बिजली मीटर, FASTag, कनेक्टेड कारें, ऑटोमैटिक मशीनें और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से जुड़े डिवाइस शामिल हैं।
TRAI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 तक भारत में M2M सिम कनेक्शनों की संख्या बढ़कर 14.05 करोड़ हो गई। जुलाई से अगस्त के बीच ही 20 लाख से अधिक नए कनेक्शन जुड़े। इससे स्पष्ट होता है कि टेलीकॉम नेटवर्क का इस्तेमाल केवल लोगों के बीच कॉल और इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि कई तरह के उपकरण भी इसका हिस्सा बन रहे हैं।
M2M कनेक्शन में एयरटेल सबसे आगे
TRAI के आंकड़ों के अनुसार, M2M कनेक्शन के बाजार में एयरटेल की हिस्सेदारी 61.25 फीसदी बताई गई है। इस तरह के कनेक्शन का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है, जहां उपकरणों की निगरानी, डेटा भेजने और दूर से जानकारी हासिल करने की जरूरत होती है।
उदाहरण के तौर पर, स्मार्ट मीटर बिजली की खपत से जुड़ा डेटा भेज सकते हैं, जबकि कनेक्टेड गाड़ियां नेटवर्क के जरिए जरूरी जानकारी साझा कर सकती हैं। ऐसे उपकरणों की संख्या बढ़ने के साथ M2M कनेक्शनों की मांग भी बढ़ती है।
JioAirFiber और Airtel Xstream AirFiber का भी योगदान
मोबाइल कनेक्शनों की संख्या में बढ़ोतरी की एक और वजह फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) सेवाएं हैं। इस श्रेणी में 5G आधारित होम इंटरनेट सेवाएं, जैसे JioAirFiber और Airtel Xstream AirFiber, शामिल हैं। इनके जरिए घरों और दफ्तरों में बिना पारंपरिक तार वाली ब्रॉडबैंड लाइन के इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है।
शहरों में तेजी से बढ़ रहे मोबाइल ग्राहक
TRAI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत में 64.2 लाख नए मोबाइल ग्राहक जुड़े। इनमें 55 लाख से अधिक कनेक्शन शहरी क्षेत्रों से आए, जो कुल बढ़ोतरी का करीब 87 फीसदी है। इससे पता चलता है कि इस अवधि में नए कनेक्शन जुड़ने की रफ्तार शहरों में अधिक रही।
कुल मिलाकर, टेलीकॉम कनेक्शनों की संख्या को केवल नए मोबाइल फोन खरीदने वाले लोगों की संख्या के बराबर नहीं माना जा सकता। इसमें आम मोबाइल ग्राहक, मशीनों में इस्तेमाल होने वाले M2M सिम और वायरलेस इंटरनेट सेवाओं से जुड़े कनेक्शन भी योगदान देते हैं।
