निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किए जाने के बाद दुनियाभर में तेल और गैस आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए ब्रिटेन की अगुवाई में 35 देशों की एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें भारत भी सक्रिय भागीदारी करेगा।
भारत की भागीदारी और कूटनीतिक सक्रियता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि इस बैठक में भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि भारत लगातार ईरान और अन्य संबंधित देशों के संपर्क में है, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
तीन अहम मुद्दों पर बनेगी रणनीति
इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा होगी—
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की निर्बाध आवाजाही
- फंसे हुए जहाजों और क्रू की सुरक्षा
- वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को जल्द से जल्द बहाल करना
इन मुद्दों पर सहमति बनाना मौजूदा संकट को कम करने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
भारत ने कहा—सभी पक्षों से संपर्क जारी
रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संवाद में है। उन्होंने कहा कि एलपीजी, एलएनजी और अन्य जरूरी उत्पादों से जुड़े भारतीय जहाजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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ईरान का सख्त रुख, दबाव में नहीं झुकने के संकेत
इस बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं आएगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि जब तक उनकी शर्तों के अनुसार समझौता नहीं होता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला जाएगा।
दुनिया की नजर बैठक के नतीजों पर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल सप्लाई का एक प्रमुख मार्ग है और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है। ऐसे में इस बैठक के नतीजों पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है, क्योंकि यही तय करेगा कि ऊर्जा संकट कब और कैसे खत्म होगा।











