जमील खान/टीकमगढ़ [Nishanebaaz News]। Tikamgarh NSUI Student Union Election Protest के तहत सोमवार को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में छात्रों का बड़ा आक्रोश देखने को मिला। एनएसयूआई (NSUI) कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव कर प्रदेश के सभी शासकीय व अशासकीय महाविद्यालयों में प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने किया।
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कलेक्टर को मौके पर बुलाने अड़े कार्यकर्ता, अधिकारियों ने लिया ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर नारेबाजी करते रहे। आंदोलनकारी छात्र कलेक्टर को मौके पर बुलाकर अपनी समस्याएं और मांगें सुनाने की जिद पर अड़े रहे। हालांकि, प्रशासनिक व्यस्तता के कारण कलेक्टर नहीं पहुंचे। बाद में स्थिति को संभालते हुए अपर कलेक्टर (ADM) शिवप्रसाद मंडराह, एसडीएम संस्कृति जैन लिटोरिया और स्थानीय तहसीलदार ने धरनास्थल पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं का ज्ञापन स्वीकार किया और उनकी मांगें शासन तक पहुंचाने का भरोसा दिया।
‘भाजपा सरकार युवा शक्ति और जेन-जी से डरी हुई है’
कलेक्ट्रेट परिसर में सभा को संबोधित करते हुए NSUI प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा:
“देशभर में युवा भाजपा सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। भाजपा के नेता देश के ‘जेन-जी’ (युवा पीढ़ी) के आक्रोश से डरे हुए हैं। यही कारण है कि मध्य प्रदेश सरकार कॉलेजों में लोकतंत्र की पहली सीढ़ी माने जाने वाले छात्रसंघ चुनाव कराने से लगातार भाग रही है। भाजपा सीधे चुनाव में हार के डर से इनडायरेक्ट (अप्रत्यक्ष) पद्धति का सहारा लेती है।”
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी दी कि छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर एनएसयूआई ने एक वर्ष पूर्व देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में याचिका दायर की थी। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया संपन्न कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
एनएसयूआई नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मध्य प्रदेश सरकार ने तय समय सीमा के भीतर डायरेक्ट चुनाव कराने की अधिसूचना जारी नहीं की, तो एनएसयूआई पूरे प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन की शुरुआत करेगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।





