सिंगरौली : मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले की जनपद पंचायत चितरंगी अंतर्गत ग्राम पंचायत कसर में विकास कार्यों के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि सरपंच और सचिव की कथित मिलीभगत से फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामला अब ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर प्रशासनिक स्तर तक चर्चा का विषय बन गया है।
बिना GST और वैध दस्तावेज के भुगतान
सूत्रों के अनुसार पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज कई भुगतानों में न तो तिथि दर्ज है, न जीएसटी नंबर और न ही कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं। कुछ बिलों पर संबंधित फर्म मालिक के हस्ताक्षर तक नहीं पाए गए, फिर भी भुगतान स्वीकृत कर राशि निकाल ली गई। “के. एल. इंटरप्राइजेज” सहित अन्य फर्मों के नाम पर सादे कागजों पर बिल लगाकर भुगतान किए जाने की बात सामने आई है, जबकि इन फर्मों के पास वैध जीएसटी पंजीयन या टिन नंबर नहीं बताए जा रहे।
निर्माण कार्यों में लागत बढ़ाकर निकासी के आरोप
कसर क्षेत्र में पीसीसी सड़क निर्माण और पंचायत भवन से जुड़े कार्यों में सेंटरिंग और भाड़े के नाम पर फर्जी खर्च दिखाकर वास्तविक लागत से अधिक राशि निकाले जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे जनपद और जिला पंचायत स्तर की निगरानी प्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष ने मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है, लेकिन जिला पंचायत सीईओ की चुप्पी संदेह को और बढ़ा रही है।
जिम्मेदारों का बचाव और स्वीकारोक्ति
सरपंच से संपर्क नहीं हो सका, जबकि सचिव ने कुछ भुगतानों को पुराने कार्यकाल से जुड़ा बताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। हालांकि उन्होंने सादे कागज पर 50 हजार रुपये के भुगतान की बात स्वीकार की, जो नियमों के विपरीत मानी जाती है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।











