Singrauli Inspiring Story : सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक ऐसी हृदयस्पर्शी और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो बताती है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो नियति के क्रूर प्रहार भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकते। यह कहानी है डॉ. शिवम जायसवाल की, जिन्होंने अपनी स्वर्गीय मां के सपने को पूरा करने के लिए अभावों और दुखों के बीच मेहनत की एक नई इबारत लिखी है।
एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी शिवम की मां का सपना था कि उनका बेटा सफेद कोट पहनकर समाज की सेवा करे। इस सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने अपनी जमीन-जायदाद तक दांव पर लगा दी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; जब शिवम अपनी पढ़ाई के संघर्षपूर्ण दौर में थे, तभी उनकी मां का असामयिक निधन हो गया। मां का साया सिर से उठने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन उनके पीछे छोड़ गए सपने ने पूरे परिवार को एक सूत्र में बांध दिया।
मां के जाने के बाद बड़े भाई मनोज जायसवाल ने एक पिता और मां, दोनों की भूमिका निभाई। मनोज ने खुद के सुखों का त्याग कर छोटे भाई की राह में आने वाली हर आर्थिक और भावनात्मक बाधा को अपने ऊपर ले लिया। घर की माली हालत ठीक न होने के बावजूद मनोज ने कभी शिवम का हौसला टूटने नहीं दिया। भाई के इसी निस्वार्थ त्याग और मां के आशीर्वाद को संबल बनाकर शिवम ने दिन-रात एक कर दी।
शिवम की वर्षों की तपस्या तब रंग लाई जब उन्होंने छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री सफलतापूर्वक प्राप्त की। आज डॉ. शिवम जायसवाल सिंगरौली जिले के ही मेडिकल कॉलेज में बतौर डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिस बेटे को डॉक्टर देखने की चाहत में मां ने अपना जीवन लगा दिया, आज वही बेटा उनके सपने को हकीकत में जी रहा है।
आज जब डॉ. शिवम अस्पताल में मरीजों का इलाज करते हैं, तो बड़े भाई मनोज की आंखों में गर्व और संतोष के आंसू छलक आते हैं। यह कहानी केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह संघर्षरत युवाओं के लिए एक संदेश है कि कठिन समय में धैर्य और अपनों का साथ हो, तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।











