Shashi Tharoor Controversy : नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल कांग्रेस के कद्दावर नेता शशि थरूर और पार्टी आलाकमान के बीच दूरियां बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में थरूर शामिल नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार, इस नाराजगी की जड़ कोच्चि में आयोजित ‘महापंचायत’ कार्यक्रम में छिपी है। बताया जा रहा है कि थरूर वहां बैठने की व्यवस्था और वक्ताओं के क्रम को लेकर खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। विशेष रूप से यह बात चर्चा में है कि राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान थरूर का नाम तक नहीं लिया, जिसे पार्टी के भीतर एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कोच्चि के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल उल्लंघन का मुद्दा काफी गरमाया हुआ है। थरूर को कथित तौर पर आश्वासन दिया गया था कि उनके भाषण के बाद सीधे राहुल गांधी बोलेंगे, लेकिन वास्तविकता में उनके बाद कई अन्य नेताओं को मंच दिया गया। थरूर समर्थकों का मानना है कि उनकी वरिष्ठता को देखते हुए यह सार्वजनिक अपमान है। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि थरूर ने नेतृत्व से अनुमति लेकर ही दिल्ली की बैठक छोड़ी थी, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक मामला आंतरिक अनुशासन और सम्मान की लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरुवनंतपुरम में एक विशाल रोड शो और विकास परियोजनाओं के जरिए केरल की राजनीति में हलचल मचा दी है। पीएम मोदी ने तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई और पीएम स्वनिधि योजना के तहत ऋण वितरित किए। अपनी जनसभा में उन्होंने केरल की सत्ताधारी वामपंथी सरकार और विपक्षी कांग्रेस, दोनों को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जमकर कोसा। पीएम ने अंग्रेजी में नारा देते हुए कहा, ‘अब वक्त है विकसित केरल का, अब वक्त है एनडीए सरकार का।’
केरल में एक तरफ प्रधानमंत्री एनडीए के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने सबसे बड़े चेहरों के बीच समन्वय बिठाने में संघर्ष कर रही है। शशि थरूर की यह चुप्पी और बैठक से दूरी आने वाले केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति पर असर डाल सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या वरिष्ठ नेताओं के साथ हो रहा यह व्यवहार पार्टी के आंतरिक ढांचे को कमजोर कर रहा है।













