शारदीय नवरात्रि 2026: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो चुकी है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना के बाद आज, 12 अक्टूबर को नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, धैर्य और संयम का प्रतीक माना जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक बताया गया है। पूजा के समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग का भी ध्यान रखें, क्योंकि मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।
मां ब्रह्मचारिणी के पूजा मंत्र
मां की आराधना के दौरान श्रद्धालु इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं-
“ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥”
ध्यान मंत्र:
“दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”
स्तुति मंत्र:
“या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक को धैर्य, आत्मसंयम और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त विशेष रूप से साधना, मंत्र जाप और सात्विक आचरण पर ध्यान देते हैं।
नवरात्रि में इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ के साथ स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार खानपान करें। फल, दूध, दही और व्रत में मान्य अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन अपनी पारिवारिक परंपरा के मुताबिक कर सकते हैं। पूजा के दौरान क्रोध, विवाद और कटु वाणी से बचने तथा सभी के प्रति सम्मान का भाव रखने की सलाह दी जाती है।
नौ दिन नवदुर्गा की आराधना
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के बाद तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता और छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना होगी। इसके बाद मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि का क्रम पूरा होगा।


