Rewa News : संजय गांधी अस्पताल में वार्ड बॉय का हंगामा, सैलरी न मिलने पर आत्मदाह की कोशिश

Rahul Goshwami
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रीवा : मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल में शनिवार शाम एक बड़ा हंगामा हो गया, जब वार्ड बॉय राहुल सोंधिया ने एक महीने से सैलरी न मिलने पर खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश कर डाली। अचानक हुई इस घटना से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्डों की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया। हंगामे के बाद कंपनी मैनेजर ने देर रात उसकी सैलरी खाते में ट्रांसफर कर दी।

अस्पताल परिसर में चीख-पुकार, पेट्रोल
शाम करीब 6 बजे अस्पताल का माहौल अचानक चीख-पुकार से गूंज उठा। वार्ड बॉय राहुल पेट्रोल की बोतल लेकर अस्पताल परिसर में पहुंचा और सभी के सामने खुद पर पेट्रोल उड़ेलते हुए जोर-जोर से चिल्लाने लगा—“मेरी सैलरी दो… नहीं तो मैं खुद को आग लगा दूंगा!”

इस अचानक घटनाक्रम से मरीजों के परिजन, डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ घबरा गए। देखते ही देखते पूरा परिसर तमाशबीनों से भर गया और लोग मोबाइल से वीडियो बनाने लगे।

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गार्डों ने जान जोखिम में डालकर पकड़ा, पेट्रोल की बोतल छीनी
राहुल पेट्रोल छिड़कने के बाद खुद को आग लगाने वाला ही था कि दो सुरक्षा गार्डों ने तुरंत छलांग लगाकर उसे पकड़ लिया। गार्डों और कर्मचारियों ने मिलकर उससे पेट्रोल की बोतल छीनी और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
करीब पाँच मिनट तक अस्पताल परिसर में दहशत जैसा माहौल बना रहा।

कंपनी पर सैलरी रोकने का आरोप, मानसिक तनाव का हवाला
राहुल ने आरोप लगाया कि वह एजाइल कंपनी के माध्यम से अस्पताल में कार्यरत है और अक्टूबर महीने की सैलरी बाकी कर्मचारियों को मिल गई, लेकिन उसे नहीं मिली।उसका कहना है कि वह कई दिनों से कंपनी और अस्पताल प्रबंधन से शिकायत कर रहा था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई, जिससे मानसिक तनाव बढ़ गया और उसने यह कदम उठाया।

हंगामे के बाद कंपनी ने ट्रांसफर की सैलरी
अस्पताल में हुए इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद कंपनी मैनेजर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वार्ड बॉय राहुल की सैलरी उसके बैंक अकाउंट में भेज दी।

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अधीक्षक का बयान— “सैलरी रोकी नहीं गई, बैंक की तकनीकी वजह थी”
अस्पताल अधीक्षक राहुल मिश्रा ने सैलरी रोकने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा—“किसी की सैलरी नहीं रोकी गई थी। बैंक की तकनीकी दिक्कत के कारण भुगतान अटका हो सकता है। इस तरह का कदम उठाना गलत है।”इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, आउटसोर्सिंग कंपनियों की पारदर्शिता और कर्मचारियों के साथ व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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