नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Papankusha Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष पापांकुशा एकादशी का यह पावन व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार यानी आज रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्रीविष्णु की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख, शांति और आरोग्य का वास होता है। वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी इस दिन 24 घंटे के कठोर उपवास का पालन करते हैं।
पारण और तिथि का समय पंचांग के भेदों के अनुसार, एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर 22 अक्टूबर (आज) को सुबह 10 बजकर 17 मिनट तक समाप्त हुई। जो श्रद्धालु आज व्रत रख रहे हैं, उनके लिए व्रत का पारण (व्रत खोलना) अगले दिन यानी 23 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 41 मिनट के बीच किया जाएगा। पारण के दिन द्वादशी तिथि सुबह 10 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी।
पापांकुशा एकादशी 2026 पूजा विधि इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से आराधना की जाती है:
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सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
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घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
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भगवान को ताजे फूल, तुलसी दल, चंदन का तिलक और पंचामृत अर्पित करें।
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घर में पवित्र शालिग्राम शिला होने पर उनका तुलसी और जल से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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पूजा के दौरान ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ऊं नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करें तथा सुबह-शाम विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा ब्रह्मवैवर्ट पुराण के प्रसंग के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत का महात्म्य बताते हुए क्रोधन नामक एक क्रूर और निर्दयी शिकारी की कथा सुनाई थी, जिसने अपने जीवनकाल में तमाम बुरे कर्म किए थे। परंतु जीवन के अंतिम पड़ाव पर अज्ञानतावश भी एकादशी के दिन किए गए सत्कर्म और व्रत के प्रभाव से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इस कथा से यह प्रेरणा मिलती है कि सच्चे प्रायश्चित और भगवान विष्णु की शरण में आने से मनुष्य के बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं।