Red Cross Blood Bank : ग्वालियर/डबरा। ग्वालियर जिले के डबरा में स्वास्थ्य विभाग की एक अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। रक्तदान महादान का नारा देने वाले रेडक्रॉस ब्लड बैंक ने दान से प्राप्त किए गए लगभग एक दर्जन जीवनदायिनी रक्त के पैकेट खुले में सड़क किनारे कचरे के ढेर में फेंक दिए। सिविल हॉस्पिटल डबरा के बाहर कचरे के ढेर में ये ब्लड के पैकेट पड़े मिले, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और जनता में भारी आक्रोश है।
यह मामला तब सामने आया जब सिविल हॉस्पिटल परिसर के बाहर सड़क किनारे, जहाँ अक्सर कूड़ा फेंका जाता है, रक्त से भरे पैकेट पड़े हुए देखे गए। ये पैकेट रेडक्रॉस ब्लड बैंक से संबंधित बताए जा रहे हैं। जनता द्वारा महादान के रूप में दिया गया यह जीवनदायिनी रक्त इस प्रकार सड़क किनारे पड़ा मिलना स्वास्थ्य विभाग की घोर संवेदनहीनता और लापरवाही को उजागर करता है।
Red Cross Blood Bank :
रक्तदान का उद्देश्य आपात स्थिति में ज़रूरतमंद मरीज़ों को जीवन बचाना होता है, और ब्लड बैंक की जिम्मेदारी होती है कि वे इस अमूल्य संसाधन का उचित भंडारण, रखरखाव और सुरक्षित निपटान करें। ऐसे में रक्त के पैकेट को खुले में फेंकना न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करता है, क्योंकि खुले में पड़ा रक्त संक्रामक रोगों के प्रसार का कारण बन सकता है।
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इस घटना की जानकारी मिलते ही डबरा के स्थानीय स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। उच्चाधिकारियों ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतने सारे रक्त के पैकेट जानबूझकर फेंके गए थे या यह किसी बड़ी चूक का परिणाम था। यह भी जांच का विषय है कि फेंके गए रक्त की समय सीमा (एक्सपायरी डेट) क्या थी और उनका नियमानुसार निपटान क्यों नहीं किया गया।
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जनता के बीच इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि एक तरफ स्वास्थ्य विभाग ‘रक्तदान महादान’ के पोस्टर लगाता है, वहीं दूसरी तरफ दान किए गए रक्त की ऐसी दुर्दशा की जा रही है। इस लापरवाही ने रेडक्रॉस ब्लड बैंक और सिविल हॉस्पिटल डबरा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।











