नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यह घोषणा करते हुए कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव जरूरी नहीं समझा गया।
इस निर्णय का सीधा असर यह है कि बैंकों के होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में तत्काल कमी की उम्मीद नहीं है, जिससे आम ग्राहकों को अभी राहत नहीं मिलेगी।
तटस्थ रुख बरकरार, आगे विकल्प खुले
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपना रुख Neutral बनाए रखा है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर RBI ब्याज दरों में कटौती या बढ़ोतरी—दोनों विकल्पों पर विचार कर सकता है।
SDF और MSF दरें भी स्थिर
RBI ने अन्य प्रमुख दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया:
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SDF दर: 5%
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MSF दर: 5.50%
केंद्रीय बैंक का मानना है कि वित्तीय प्रणाली में संतुलन बनाए रखने के लिए दरों का स्थिर रहना फिलहाल उचित है।
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मजबूत आर्थिक संकेत और नियंत्रित महंगाई
RBI के अनुसार भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.4% पर बनी हुई है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत स्थिति दर्शाती है।
महंगाई को लेकर भी केंद्रीय बैंक ने कहा कि:
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वित्त वर्ष 2026 में खुदरा महंगाई लगभग 2.1% रही
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चौथी तिमाही का अनुमान बढ़कर 3.2%
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FY27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए अनुमान 4% और 4.2%
इसके बावजूद महंगाई अभी भी नियंत्रित दायरे में मानी जा रही है।
वैश्विक डील से निर्यात को मिलेगा सहारा
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौता और भारत-EU FTA जैसे कदम देश के निर्यात और निवेश माहौल को मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि भारत विदेशी निवेशकों के लिए अब भी आकर्षक बना हुआ है।
साथ ही जल्द ही GDP और महंगाई की गणना के लिए नया बेस ईयर लागू होने वाला है, जिससे आर्थिक आंकड़ों की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर RBI ने संकेत दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली और स्थिर बनी हुई है, इसलिए फिलहाल नीतिगत दरों में बदलाव की जल्दबाजी नहीं की जाएगी।













