Raigarh Road Scam: एमएमजीएसवाई योजना के नियमों की अनदेखी से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, उच्चस्तरीय जांच के लिए खोला मोर्चा

VIKASH KHALKHO

Raigarh Road Scam: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (MMGSY) राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत विकास और बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसी योजना के अंतर्गत घरघोड़ा क्षेत्र में संचालित सड़क निर्माण कार्य एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। यह पूरा मामला छाल रोड से तिलाईपाली–पंडरीपानी स्कूल तक निर्मित की जा रही सड़क का है, जहां ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। परिणामस्वरूप, स्थानीय जनता में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

गुणवत्ता और सामग्री पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता भी बिल्कुल संतोषजनक नहीं है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बेस लेयर में गिट्टी, फाइन एग्रीगेट (मरम) तथा फ्लोर गिट्टी का निर्धारित अनुपात नहीं रखा जा रहा है। इसके साथ ही, छोटी गिट्टी का उपयोग भी बेहद कम या लगभग नगण्य किया जा रहा है। इस लापरवाही से सड़क की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित होने की पूरी आशंका जताई जा रही है। कई स्थानों पर यह कहकर कि नीचे पुरानी सड़क मौजूद है, सीमेंट कंक्रीट सड़क की मोटाई निर्धारित मानक के बजाय मात्र 4 इंच तक सीमित कर दी गई है।

तकनीकी मानकों को लेकर बढ़ी चिंता

जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क की कुल संरचनात्मक मोटाई मिट्टी की प्रकृति और यातायात के भार पर निर्भर करती है। सामान्यतः स्वीकृत डिजाइन के तहत यह मोटाई लगभग 30 से 45 सेंटीमीटर तक रखी जाती है। इसके बावजूद, घरघोड़ा क्षेत्र में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों से कम मोटाई या गुणवत्ता का उपयोग किया गया है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक हो जाती है। निश्चित रूप से, मानकों की यह अनदेखी सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है।

नई सड़क में दरारें और निगरानी पर प्रश्न

ग्रामीणों का दावा है कि निर्माणाधीन अथवा हाल ही में बनी सीसी सड़क के कुछ हिस्सों में अभी से बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति निर्माण की बेहद खराब गुणवत्ता को उजागर करती है। इसके फलस्वरूप, जिला स्तर पर होने वाली निरीक्षण एवं गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे सब-इंजीनियरों तथा संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी गहरा संदेह व्यक्त किया है। यदि वास्तव में सड़क की मोटाई इतनी कम है, तो भुगतान किस मानक के आधार पर होगा, इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों की राय और उच्चस्तरीय जांच की मांग

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार सड़क निर्माण में निर्धारित मोटाई, उचित संपीड़न और स्वीकृत तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य होता है। इनमें किसी भी प्रकार की कमी सड़क की आयु को प्रभावित करती है तथा भविष्य में सड़क के शीघ्र क्षतिग्रस्त होने का कारण बनती है। छाल रोड से तिलाईपाली–पंडरीपानी स्कूल तक बन रही सड़क को लेकर सामने आए आरोपों के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया तो इससे क्षेत्रीय विकास और आम जनता की सुविधाएं हमेशा के लिए प्रभावित होंगी।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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