घरघोड़ा/रायगढ़। ज़िला मुख्यालय से लगे पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार देर रात की गई छापेमारी में माइनिंग अफसरों ने एक हाइवा वाहन को पकड़ा, जो बिना अनुमति रेत ढो रहा था।
सूत्रों के अनुसार पकड़े गए हाइवा का मालिक एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता का करीबी बताया जा रहा है, जो घरघोड़ा क्षेत्र का निवासी है। इस खुलासे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
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थाने में खड़ा कराया गया हाइवा
पकड़े गए हाइवा को पूंजीपथरा थाने में खड़ा करा दिया गया है। वहीं खनिज विभाग की टीम वाहन से संबंधित दस्तावेजों और खनन की अनुमति की जांच में जुटी हुई है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में आमतौर पर औपचारिक कार्यवाही के बाद चोरी की धारा के तहत अपराध दर्ज किया जाता है। इसलिए इस बार भी संभावना जताई जा रही है कि पूंजीपथरा थाना पुलिस इसी धारा में प्रकरण दर्ज कर सकती है।
बड़े सवालों के घेरे में कार्रवाई
इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
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क्या माइनिंग विभाग केवल औपचारिक कार्यवाही तक सीमित रहेगा?
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क्या सत्ता से जुड़े रसूखदारों के दबाव में पुलिस ढीली पड़ जाएगी?
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क्या फिर इस बार कानून के मुताबिक सख्ती से कार्रवाई होगी?
प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल
खनिज माफियाओं पर शिकंजा कसने के दावे अक्सर सरकार और प्रशासन की ओर से किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी कहते हैं। सत्ता से जुड़े लोगों का संरक्षण मिलने की वजह से अवैध खनन और परिवहन का कारोबार फल-फूल रहा है।
यह मामला प्रशासन की नीयत और सिस्टम की सच्चाई को उजागर करता है, साथ ही यह भी बताता है कि क्या वास्तव में अवैध खनन पर अंकुश लगाने की इच्छाशक्ति है या फिर कार्रवाई केवल कागजों और प्रेस विज्ञप्तियों तक ही सीमित है।











