Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष यानी श्राद्ध पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इन दिनों तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे कर्म किए जाते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृपक्ष के कुछ शुभ संकेतों का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें पूर्वजों की कृपा और आशीर्वाद से जोड़कर देखा जाता है। जानिए ऐसे 5 संकेतों के बारे में।
सपने में पूर्वजों का दिखाई देना
पितृपक्ष के दौरान अगर दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी या परिवार के अन्य पूर्वज सपने में शांत और प्रसन्न नजर आएं, तो धार्मिक मान्यता में इसे शुभ माना जाता है। इसे पूर्वजों के आशीर्वाद से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे अवसर पर उनकी स्मृति में दान-पुण्य और जरूरतमंदों की मदद करना शुभ माना जाता है।
घर पर कौवे का आना
हिंदू परंपरा में श्राद्ध के दौरान कौवे को पितरों से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि श्राद्ध कर्म के बाद कौवे को भोजन कराने की परंपरा है। पितृपक्ष में कौवे का घर आकर भोजन ग्रहण करना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की तृप्ति और आशीर्वाद का संकेत माना जाता है।
काली चींटियों का दिखाई देना
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में घर के आसपास काली चींटियों का दिखाई देना शुभ माना जाता है। पितृपक्ष में इसे सकारात्मक संकेत से जोड़कर देखा जाता है। परंपरा के अनुसार चींटियों को आटा या चीनी खिलाना दान-पुण्य का एक तरीका माना जाता है।
जरूरतमंद की मदद करने का अवसर मिलना
पितृपक्ष में दान और सेवा का विशेष महत्व माना जाता है। अगर इन दिनों किसी जरूरतमंद को भोजन कराने, कपड़े देने या उसकी आर्थिक मदद करने का अवसर मिले, तो धार्मिक दृष्टि से इसे सकारात्मक माना जाता है। मान्यता है कि दूसरों की मदद करना पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का भी एक माध्यम है।
लंबे समय से रुके काम पूरे होना
अगर लंबे समय से अटका कोई काम पितृपक्ष के दौरान अचानक पूरा होने लगे या किसी समस्या का रास्ता निकल आए, तो धार्मिक मान्यताओं में इसे भी शुभ संकेत माना जाता है। हालांकि, ऐसे बदलावों को पितरों की कृपा से जोड़ना आस्था और धार्मिक विश्वास का विषय है।






