Pathalgaon School Corruption Allegations : गौरी शंकर गुप्ता/जशपुर/पत्थलगांव (20 फरवरी 2026): छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सरकारी तंत्र की ‘लालफीताशाही’ का एक नया उदाहरण सामने आया है। पत्थलगांव स्थित इंदिरा गांधी शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लटकाने की कोशिश पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने कड़ी फटकार लगाई है। प्राचार्य ने रिकॉर्ड मिलान के नाम पर 29 दिन का ‘अतिरिक्त समय’ मांगा था, जिसे विभाग ने पूरी तरह से अवैधानिक करार दिया है।
लाखों की निधि के हिसाब पर चुप्पी
मामला 1 जनवरी 2018 से अब तक विद्यालय को प्राप्त सरकारी अनुदान, विकास निधि और जनभागीदारी निधि से जुड़ा है। एक पत्रकार द्वारा दाखिल RTI में 5,000 रुपये से अधिक की खरीदी के कोटेशन, स्टॉक पंजी, कैश बुक और ऑडिट रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग की गई थी। इतने वर्षों के वित्तीय लेन-देन का ब्यौरा मांगे जाने पर विद्यालय प्रबंधन अब बहानेबाजी पर उतर आया है।
प्राचार्य के बहाने और DEO का कड़ा रुख
प्राचार्य ने तर्क दिया कि जानकारी पुरानी होने के कारण रिकॉर्ड के परीक्षण हेतु 29 दिन का अतिरिक्त समय चाहिए। साथ ही यह दावा भी किया कि उन्हें आवेदन की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की जनसूचना अधिकारी श्रीमती सरोज खलखो ने कड़ा पत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया कि:
- RTI कानून में 30 दिन की समय-सीमा के बाद ‘अतिरिक्त समय’ का कोई प्रावधान नहीं है।
- जानकारी में देरी होने पर 250 रुपये प्रतिदिन का विलंब शुल्क प्राचार्य को अपनी निजी जेब से भरना होगा।
- राज्य सूचना आयोग के समक्ष किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्राचार्य स्वयं जिम्मेदार होंगे।
‘सूचना रोकना दुर्भावनापूर्ण’: प्रथम अपील दायर
जानकारी न मिलने से क्षुब्ध आवेदक ने अब प्रथम अपील दायर कर दी है। अपील में आरोप लगाया गया है कि रिकॉर्ड अन्यत्र होने का बहाना बनाकर सूचना को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोका जा रहा है। आवेदक ने मांग की है कि धारा 7(1) की समय-सीमा का उल्लंघन करने के लिए संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो और समस्त जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
क्यों गंभीर है यह मामला?
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकारी और जनभागीदारी निधि के उपयोग में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। ऑडिट रिपोर्ट और कैश बुक देने में आनाकानी करना वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि DEO की फटकार के बाद विद्यालय प्रशासन जानकारी उपलब्ध कराता है या राज्य सूचना आयोग की गाज गिरनी तय है।













