Niwari News : 78 साल बाद भी विकास से वंचित: ‘उत्कृष्ट’ घोषित खिरक गांव कीचड़ से जूझता, सड़क नहीं, सुविधाएं नहीं

Sanjay Sahu
Niwari News

Niwari News : नीरज कुशवाहा/ निवाड़ी : आजादी के 78 साल बाद भी विकास को तरसता निवाड़ी जिले का पाराखेरा का खिरक गांव, जहां सड़क नहीं होने के चलते आज भी लोग बारिश के मौसम में कीचड़ भरे रास्ते से आने जाने को मजबूर हैं, हाल ही में इस ग्राम पंचायत को जिला प्रशासन ने टॉप 10 गांवों में शामिल होने पर उत्कृष्ट का दर्जा दिया था, जिसे सर्व सुविधा युक्त गांव बताया गया था.

Niwari News : भले ही इस गांव को कागजों में जिला प्रशासन सर्व सुविधा युक्त बताया हो, लेकिन आज भी ग्रामीण मुख्य मार्ग तक जोड़ने वाली 2 किलोमीटर की पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं, इस ग्राम पंचायत की हकीकत मिलने वाले अवार्ड से बिल्कुल अलग है, इन तस्वीरों से यह तो स्पष्ट नजर आ रहा है की इस पंचायत को अधिकारियों ने उत्कृष्ट ग्राम पंचायत का ताज क्या सोच कर पहनाया है, सवाल इस बात का है की आखिर अवार्ड देने से पहले क्या गांव की असली तस्वीर इन अधिकारियों ने क्यों नहीं देखी या फिर आंखों पर पट्टी बांधकर अवार्ड दे दिया।

Niwari News : दरअसल यह पूरा मामला निवाड़ी जिले की पृथ्वीपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पाराखेरा का खिरक है, जहां ग्राम पंचायत के अंतर्गत तकरीबन 800 लोगों की आबादी वाला आम रास्ता कीचड़ में तब्दील है, यहां पक्की सड़क ना होने के कारण स्कूली छात्र-छात्राओं व आमजन को 2 से 3 फीट गहरे कीचड़ भरे रास्ते से अपना रास्ता खोज कर आना जाना पड़ता है, इस रास्ते से रोज सैकड़ो लोगों का आवागमन रहता है और यहां के हालात बारिश के समय में और बद से बत्तर हो जाते हैं, यहां जल भराव होने के कारण किसी भी प्रकार के यातायात के साधनों का आना जाना संभव नहीं हो पाता है.

Niwari News : लोगों की माने तो यहां इस गांव में इमरजेंसी सेवा एम्बुलेंस अथवा अन्य साधनों का निकल पाना संभव नहीं रहता है और ऐसे में अगर कोई बीमार पड़ता है या किसी भी प्रकार की समस्या आती है, तो चारपाई या कंधों पर बैठाकर कर ले जाना पड़ता है, इस गांव में एक स्कूल भी है, जहां पर स्कूली बच्चों को अपने कपड़े उतार कर कंधे पर बिठाकर और हाथों में चप्पल लेकर परिजन निकलते हैं.

Niwari News : इन तस्वीरों से यह तो स्पष्ट नजर आ रहा है की इस पंचायत को अधिकारियों ने उत्कृष्ट ग्राम पंचायत का ताज क्या सोच कर पहनाया है, सवाल इस बात का है की आखिर अवार्ड देने से पहले क्या गांव की असली तस्वीर इन अधिकारियों ने क्यों नहीं देखी, या फिर आंखों पर पट्टी बांधकर अवार्ड दे दिया, कहीं ना कहीं यह तस्वीरें सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं, वही ग्रामीणों ने अधिकारियों को भी कई बार अवगत कराया गया, आवेदन निवेदन किया गया, इसके वावजूद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

Niwari News : वहीं जब संबंध में जनपद पंचायत सीईओ से बात की गई तो उनका वही हर बार की तरह रटा-रटाया जवाब दिया, की आपने इस मामले की जानकारी दी है दिखवाते हैं, मौके पर जाकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, साहब के इस जवाब से यह तो स्पष्ट होता है की अधिकारियों ने अपने दफ्तर में बैठकर इस गांव को सर्व सुविधायुक्त गांव बता दिया हो जबकि उन्हें खुद ही नहीं पता इस गांव की स्थिति क्या है।

 

 

 

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