कुशीनगर। Nishaanebaz.com-Nepal Floods Impact: पड़ोसी देश नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का भयानक असर अब उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी साफ दिखाई देने लगा है। कुशीनगर जिले के खड्डा क्षेत्र में बहने वाली गंडक नदी से शनिवार (29 अगस्त 2026) को तीन अज्ञात शव बरामद किए गए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को खड्डा के मदनपुर-सुकरौली इलाके में स्थित वाल्मीकि नगर बैराज के तीसरे खंभे के पास नदी के तेज बहाव में ये शव तैरते हुए दिखाई दिए थे, जिसके बाद तुरंत राहत व बचाव अभियान शुरू किया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही राज्य आपदा मोचक बल (SDRF) की निगरानी टीम और खड्डा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। खड्डा थाना प्रभारी संदीप सिंह ने बताया कि एसडीआरएफ की टीम ने गंडक नदी में तैरते शवों को सुरक्षित बाहर निकाला। शवों की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि ये नेपाल में आई बाढ़ में बहे लोग हो सकते हैं। मृतकों की शिनाख्त और पहचान प्रक्रिया में मदद के लिए नेपाल के सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत सूचित किया गया है, हालांकि अभी तक किसी भी शव की पहचान नहीं हो सकी है।
उल्लेखनीय है कि कुशीनगर में मिले इन शवों से ठीक एक दिन पहले पड़ोसी जिले महराजगंज में भी एक नदी से चार क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए थे। नेपाल के रसुवा और मध्य क्षेत्र में अचानक आई भीषण बाढ़ से व्यापक तबाही मची है, जिसमें अब तक 626 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 2,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में तबाही के कारण गंडक नदी के तेज प्रवाह के साथ बड़ी संख्या में चारपहिया वाहन, घरेलू सामान, गैस सिलेंडर, ड्रम, फर्नीचर और भारी मात्रा में मलबा भारतीय सीमा की तरफ बहकर आ रहा है।
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नदी के किनारे बहकर आ रहे कीमती सामान को निकालने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के जमा होने की खबर पर प्रशासन ने कड़ी चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में सामान निकालने के लिए उफनती नदी में न उतरें और कोई भी संदिग्ध वस्तु या शव दिखाई देने पर तत्काल पुलिस व प्रशासन को सूचित करें। हालांकि, गंडक नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है जिससे बाढ़ का तात्कालिक खतरा टल गया है, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुशीनगर प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें लगातार संवेदनशील तटवर्ती इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी रख रही हैं।





