Illegal Timber Storage in Abhanpur: अभनपुर में फिर उजागर हुआ प्रतिबंधित लकड़ी के अवैध भंडारण का मामला, राजस्व विभाग कर रहा जांच; परिवहन को लेकर वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

VIKASH KHALKHO

Illegal Timber Storage in Abhanpur: अभनपुर (रायपुर)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे अभनपुर क्षेत्र में प्रतिबंधित प्रजातियों की लकड़ी के अवैध कारोबार और कटाई का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में हुकमचंद-मामनचंद सॉ मिल से लाखों रुपये की प्रतिबंधित लकड़ी बरामदगी और दो सॉ मिलों पर प्रशासनिक गाज गिरने के बाद अब अभनपुर से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम आमनेर में भारी मात्रा में प्रतिबंधित अर्जुन (कहुवा) एवं अन्य प्रजातियों की लकड़ियों के अवैध भंडारण का नया मामला उजागर हुआ है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग के गश्ती तंत्र, परिवहन अनुज्ञा (TP) प्रक्रिया और क्षेत्रीय मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

9 फीट ऊंची बाउंड्रीवाल के पीछे छिपाया गया था जखीरा

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम आमनेर में एक निजी परिसर के भीतर लगभग 9 फीट ऊंची बाउंड्रीवाल बनाकर उसके अंदर बड़े पैमाने पर लकड़ियों की थप्पियां (चट्टियां) बनाकर रखी गई हैं।

  • प्रतिबंधित अर्जुन लकड़ी अधिक: इस भंडारण में सबसे ज्यादा मात्रा प्रतिबंधित प्रजाति अर्जुन (कहुवा) की बताई जा रही है, जिसकी कटाई और परिवहन पर सख्त कानूनी नियम लागू हैं।

  • बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का अंदेशा: प्रथम दृष्टया यह मामला क्षेत्र के जंगलों या निजी भूमियों से की गई बड़े पैमाने पर अवैध कटाई और फिर उसे सुरक्षित स्थान पर जमा करने से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।

राजस्व विभाग की जांच जारी, सॉ मिल कनेक्शन की चर्चा

चूंकि जिस जगह पर यह लकड़ी रखी गई है वह राजस्व भूमि के दायरे में आती है, इसलिए राजस्व विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण कर अपनी प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। टीम जमीन के मालिक (भू-स्वामी), लकड़ी के वास्तविक मालिक और यह लकड़ी वहां तक कैसे पहुंची, इसके दस्तावेज जुटा रही है।

चर्चाओं का बाजार गर्म:

सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा है कि आमनेर में रखी गई यह लकड़ी हाल ही में कार्रवाई की जद में आए हुकमचंद-मामनचंद सॉ मिल से जुड़े लोगों की ही हो सकती है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस दावे की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

परिवहन पर वन विभाग मौन क्यों? डिप्टी रेंजर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जानकारों का कहना है कि भले ही भूमि राजस्व विभाग की हो, लेकिन प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ी के परिवहन (Transport), वैध टीपी (Transit Pass) और वन अपराध (Forest Offence) की जांच का मुख्य अधिकार क्षेत्र वन विभाग का है।

  1. परिवहन पर सवाल: इतनी भारी मात्रा में अर्जुन की लकड़ी सड़कों से होकर आमनेर तक कैसे पहुंच गई और वन विभाग के नाकों या उड़नदस्ते को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?

  2. डिप्टी रेंजर पर आरोप: रायपुर वन मंडल के नया रायपुर परिक्षेत्र अंतर्गत अभनपुर में पदस्थ डिप्टी रेंजर की कार्यप्रणाली पर स्थानीय ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।

  3. कम होता हरित आवरण: क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले 3-4 वर्षों में अभनपुर और आसपास के इलाकों में अंधाधुंध पेड़ काटे गए हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है।

जनभावना: अधिकारियों के स्थानांतरण और कठोर कार्रवाई की मांग

लगातार सामने आ रहे वन अपराधों से क्षुब्ध क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि यदि अभनपुर क्षेत्र लकड़ी माफियाओं का संवेदनशील केंद्र बनता जा रहा है, तो शासन-प्रशासन को पूरे मैदानी अमले की समीक्षा करनी चाहिए। यदि आवश्यकता हो तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों का तत्काल स्थानांतरण (Transfer) किया जाना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और वन संपदा को बचाया जा सके। फिलहाल पूरे मामले में राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद क्या वन विभाग अवैध कटाई और परिवहन में संलिप्त भू-स्वामियों, ठेकेदारों अथवा जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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