भूपेंद्र भदौरिया/ग्वालियर : मध्य प्रदेश में सबसे बहुचर्चित अर्चना तिवारी मामले में ग्वालियर के भंवरपुरा थाना में पदस्थ आरक्षक राम सिंह तोमर को जीआरपी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस ने देर रात से राम सिंह से पूछताछ शुरू की है।
Read More : Vice President Election : INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर दीदी को क्यों हैं ऐतराज…
संदिग्ध आरक्षक का बयान:
राम सिंह तोमर ने दावा किया है कि वह अर्चना तिवारी से कभी आमने-सामने नहीं मिले हैं। उनका कहना है, “मैं अर्चना से आज तक फेस टू फेस नहीं मिला। केवल मेरे दोस्त विक्रम राजावत के जरिए मोबाइल पर बातचीत हुई थी। मैंने केवल उसका टिकट कराया था। मुझे इस मामले में फंसाया जा रहा है। मैं बेकसूर हूँ। अर्चना कहां है, मुझे नहीं पता।”
जांच में सामने आया तथ्य:
जीआरपी की जांच में पता चला कि राम सिंह तोमर और अर्चना के बीच पिछले छह महीनों से लंबी-लंबी मोबाइल बातचीत हो रही थी। इसी बातचीत के आधार पर राम तोमर संदिग्ध के रूप में पुलिस के रडार पर आए।
परिवार का दावा:
अर्चना तिवारी के भाई अंशुल मिश्रा का कहना है कि उन्होंने अर्चना से संपर्क किया है और वह कुशल है। अंशुल मिश्रा अर्चना को लेने के लिए ग्वालियर के लिए रवाना हो गए हैं।
हालांकि, पुलिस को अभी तक अर्चना तिवारी का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।
Read More : Maharashtra Politics : शिंदे गुट को झटका, 40 कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल…इतना बड़ा उलटफेर आखिर कैसे हुआ……बाइट्स:
-
राम सिंह तोमर, आरक्षक (संदिग्ध): “मैं केवल मोबाइल पर बात की थी, मेरा कोई लेना-देना नहीं है।”
-
लाल कृष्णचांदनी, ASP, ग्वालियर: “जांच जारी है, अर्चना का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।”











