Thursday, August 27, 2026
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Navratri 2025 Day 4 : आज नवरात्रि का चौथा दिन, जानें मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र और भोग….

Navratri 2025 Day 4
Navratri 2025 Day 4

उज्जैन / विशेष रिपोर्ट: नवरात्रि के चौथे दिन माता कूष्मांडा का पूजन किया जाता है। माता कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, जो अपने प्रकाश और ऊर्जा से ब्रह्मांड की रचना करती हैं। मान्यता है कि उनकी पूजा से सभी रोग नष्ट होते हैं, और भक्तों को बल, बुद्धि, आयु, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

1. पूजा विधि (Pooja Vidhi)

  • सुबह उठकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और स्नान करें।

  • पूजा स्थल को साफ करें और आसन बिछाएं।

  • माता की प्रतिमा या फोटो को गंगाजल से स्नान कराएं।

  • उन्हें अक्षत, लाल चंदन, चुनरी, लाल और पीले पुष्प, रुद्राक्ष और अन्य शुभ सामग्री अर्पित करें।

  • दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

  • भोग में मालपुआ, पेठा, दही या हलवा अर्पित करें।

  • मंत्रों का जाप कर आरती करें और मां के चरणों में प्रणाम करें।

2. ध्यान और मंत्र (Mantra)

  • मुख्य मंत्र:
    “दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
    जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्।”

  • सर्वभूत मंत्र:
    “या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”

  • सुरासम्पूर्ण कलश मंत्र:
    “सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
    दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु मे।”

मंत्र जाप से भक्तों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

3. भोग (Bhog)

  • माता कूष्मांडा को विशेष रूप से आटे और घी से बने मालपुआ का भोग अर्पित करना चाहिए।

  • अन्य विकल्प: पेठा, दही या हलवा।

  • भोग अर्पित करने से बल-बुद्धि, ज्ञान और कौशल की वृद्धि होती है।

4. आरती विधि (Aarti Vidhi)

  • पूजा के बाद दीपक और अगरबत्ती के साथ आरती करें।

  • फूल, नैवेद्य और घी का दीपक माता के सामने रखें।

  • आरती के समय भक्त “कूष्मांडा जय जग सुखदानी…” गाते हैं।

  • सुबह और शाम दोनों समय आरती की जाती है।

5. महत्व (Significance)

  • माता कूष्मांडा ने अपने उदर से अंडाकार ऊर्जा पिंड के रूप में ब्रह्मांड की रचना की।

  • उनकी उपासना से अनाहत चक्र जागृत होता है।

  • भक्तों के रोग, शोक और बाधाएँ दूर होती हैं।

  • आयु, यश, बल, स्वास्थ्य, ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

6. कथा (Kushmanda Mata Katha)

  • मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, जब त्रिदेवों ने सृष्टि की रचना के लिए मां दुर्गा से सहायता मांगी, तो चौथे स्वरूप कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया।

  • उनके मुखमंडल से प्रकाश निकलने के कारण सम्पूर्ण जगत प्रकाशित हुआ।

  • तभी से उन्हें माता कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है।

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