National Awards : नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक नेशनल फिल्म अवॉर्ड हर कलाकार के लिए सपने जैसा होता है। पर कुछ सितारे ऐसे भी होते हैं जो इस सपने को सिर्फ एक बार नहीं, बार-बार जीते हैं। ऐसी ही एक अदाकारा हैं शबाना आज़मी, जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से एक इतिहास रचते हुए 25 वर्षों में 5 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अपने नाम किए।
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1974 में ‘अंकुर’ से रखी थी शुरुआत
श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म ‘अंकुर’ में शबाना आज़मी ने एक दलित महिला का किरदार निभाया। यही फिल्म उनके करियर की पहली फिल्म थी और इसी फिल्म के लिए उन्हें 1975 में उनका पहला नेशनल अवॉर्ड मिला। उस वक्त किसी नए चेहरे के लिए यह उपलब्धि अभूतपूर्व मानी गई थी।
1980 के दशक में रचा रिकॉर्ड
अगले एक दशक में शबाना ने सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर बनी फिल्मों में दमदार अभिनय से न केवल दर्शकों का दिल जीता बल्कि एक के बाद एक तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया।
- 1982 में फिल्म ‘अर्थ’ के लिए दूसरा नेशनल अवॉर्ड
- 1984 में फिल्म ‘खंडहर’ के लिए तीसरा
- 1985 में ‘पार’ के लिए चौथा अवॉर्ड
‘पार’ जैसी फिल्मों में उन्होंने भूमिहीन श्रमिकों के संघर्ष को जीवंत किया, जो भारतीय आर्ट सिनेमा का अहम हिस्सा बन गई।
1999: गॉडमदर बनकर रचा इतिहास
शबाना आज़मी का पाँचवां नेशनल अवॉर्ड उन्हें 1999 में फिल्म ‘गॉडमदर’ के लिए मिला, जो गुजरात की महिला गैंगस्टर संतोबेन जडेजा की कहानी से प्रेरित थी। फिल्म में उनका किरदार एक महिला की सत्ता, संघर्ष और सामाजिक विद्रोह का प्रतीक बन गया।
बॉलीवुड में सबसे अधिक नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली अभिनेत्री
इन पांच राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ शबाना आज़मी ने खुद को भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों की सूची में शीर्ष पर स्थापित कर लिया। उनका नाम आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
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सिर्फ अवॉर्ड नहीं, सामाजिक चेतना भी
शबाना आज़मी ने अपने करियर में केवल अदाकारी नहीं की, बल्कि महिला अधिकारों, गरीबी, शोषण और जातिवाद जैसे मुद्दों पर बेबाकी से आवाज़ भी उठाई। उनके लिए सिनेमा सिर्फ कैमरे के सामने अभिनय नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का एक माध्यम है।











