Nalwa Steel & Power Limited : हम मिट्टी के लोग हैं, हमें खदानें नहीं, खेत चाहिए….खरोरा में नलवा सीमेंट खदान का ग्रामीणों ने किया उग्र विरोध, 55 हजार लोगों पर खतरे की आशंका

Nalwa Steel & Power Limited : रायपुर : रायपुर से सटे खरोरा क्षेत्र में मेसर्स नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित सीमेंट प्लांट की खदान को लेकर तनाव गहराता जा रहा है। कंपनी द्वारा खदान की स्थापना की योजना के खिलाफ क्षेत्र के ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। बताया जा रहा है कि यह खदान करीब 55 हजार लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि जनसुनवाई के दौरान सैकड़ों ग्रामीण भारी बारिश के बावजूद विरोध दर्ज कराने पहुंचे।

Nalwa Steel & Power Limited : ग्रामीणों की नाराजगी और चिंता:

Nalwa Steel & Power Limited : ग्रामीणों का प्रमुख तर्क है कि खदान में बार-बार किए जाने वाले विस्फोटों से कंपन पैदा होंगे, जिससे मकानों की नींव कमजोर हो सकती है और भूगर्भीय अस्थिरता उत्पन्न होगी। ग्रामीणों का कहना है कि उनका जीवन, खेती, पशुपालन और पर्यावरण पूरी तरह से प्रभावित होगा। प्रभावित गांवों की सूची में पचरी (90 मीटर), छडिया (140 मीटर), मंधईपुर (170 मीटर), नहरडीह (400 मीटर), मोतिमपुर (230 मीटर) और आलेसुर (350 मीटर) जैसे गांव बेहद नजदीक हैं। यह दूरी खदान के खतरों को और अधिक गंभीर बनाती है।

Nalwa Steel & Power Limited : जनसुनवाई में विरोध की तस्वीर:

Nalwa Steel & Power Limited : मोतिमपुर में टेंट लगाकर ग्रामीणों ने रात भर विरोध किया। करीब 900 ग्रामीणों ने जनसुनवाई में भाग लिया और स्पष्ट तौर पर खदान परियोजना को खारिज करने की मांग की। मौके पर 400 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन को स्थिति के संवेदनशील होने का अंदेशा था।

Nalwa Steel & Power Limited : जनप्रतिनिधियों ने भी दिया साथ

Nalwa Steel & Power Limited : पचरी के सरपंच और सरपंच संघ के अध्यक्ष अभिषेक वर्मा** ने बताया कि वे सुबह से ही जनसुनवाई स्थल पर मौजूद थे और लगातार ग्रामीणों की भावनाएं और आपत्तियां अधिकारियों के सामने रख रहे थे। उन्होंने बताया कि यह कोई मामूली विरोध नहीं है, बल्कि गांव की अस्मिता, भविष्य और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

Nalwa Steel & Power Limited : आत्मदाह की चेतावनी

Nalwa Steel & Power Limited : स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब कुछ ग्रामीणों ने आत्मदाह की चेतावनी दी। उनका कहना है कि यदि इस परियोजना को मंजूरी दी गई, तो वे अपने जीवन का बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। यह चेतावनी प्रशासन और कंपनी दोनों के लिए एक अलार्म है।

Nalwa Steel & Power Limited : प्रशासन और कंपनी के लिए चुनौती:

Nalwa Steel & Power Limited : इस पूरे मामले ने न केवल एक आर्थिक परियोजना को सामाजिक संकट में बदल दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना विकास परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ाई जा सकतीं। अब प्रशासन और नलवा कंपनी दोनों के लिए यह एक बड़ी नैतिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुका है — क्या वे ग्रामीणों की आशंकाओं को दूर कर समाधान निकाल पाएंगे या यह आंदोलन और तीव्र होगा?

Nalwa Steel & Power Limited : यह मामला छत्तीसगढ़ की भूमि-संवेदनशीलता, ग्रामीण सहभागिता और पर्यावरणीय सतर्कता का प्रतीक बन चुका है। जहां एक ओर राज्य औद्योगिक विकास की ओर बढ़ना चाहता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिक अपनी जड़ों, जीवन और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस टकराव में केवल संतुलन ही स्थायी समाधान बन सकता है। हम मिट्टी के लोग हैं, हमें खदानें नहीं, खेत चाहिए।” — मोतिमपुर की एक बुजुर्ग महिला की जनसुनवाई में कही गई बात, जो ग्रामीणों की भावनाओं को बखूबी बयां करती है।

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