Tuesday, September 1, 2026
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Ujjain Mahakal Dham: महाकाल मंदिर में गूंजा “हर-हर महादेव”; ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न हुई दिव्य भस्म आरती

Mahakal Bhasma Aarti Ujjain : विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में रविवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त के दौरान आयोजित हुई भव्य भस्म आरती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सुबह करीब चार बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।

उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दरबार में हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती सनातन परंपरा की सबसे अनूठी धार्मिक विधियों में से एक मानी जाती है। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस दिव्य आयोजन के दर्शन किए।

पंचामृत अभिषेक से शुरू हुआ पूजन

Mahakal Bhasma Aarti Ujjain :  भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का पारंपरिक पंचामृत अभिषेक किया गया। मंदिर के पुजारियों द्वारा जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिवत अभिषेक किया गया।

इस दौरान गर्भगृह में वैदिक मंत्रों का उच्चारण, रुद्रपाठ और शंखध्वनि लगातार गूंजती रही। आध्यात्मिक वातावरण में उपस्थित श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ पूजन प्रक्रिया का हिस्सा बने रहे।

भस्म श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र

अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष भस्म श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु देर रात से ही कतार में लगे हुए थे।

सनातन धर्म में भस्म को वैराग्य, जीवन की नश्वरता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। महाकाल मंदिर की भस्म आरती इसी विशेष परंपरा के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु

Mahakal Bhasma Aarti Ujjain :  महाकालेश्वर मंदिर में रविवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। कई भक्त रात से ही मंदिर परिसर में पहुंच गए थे ताकि उन्हें ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली आरती के दर्शन मिल सकें।

मंदिर परिसर में भजन, मंत्र-जप और ध्यान का अनोखा संगम देखने को मिला। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करते नजर आए।

विश्व आस्था का प्रमुख केंद्र बना उज्जैन

उज्जैन का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा महाकाल कालों के काल हैं और उनकी आराधना से भय, नकारात्मकता और मानसिक तनाव दूर होता है। यही वजह है कि उज्जैन आज विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है।

श्रद्धालुओं को मिला आध्यात्मिक अनुभव

भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में पूरी तरह लीन नजर आए। कई भक्तों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।

महाकाल मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भस्म आरती के लिए पंजीकरण कराते हैं। विशेष अवसरों और सावन-भादो जैसे धार्मिक महीनों में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

सनातन परंपरा की जीवंत पहचान

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक मानी जाती है। उज्जैन में हर सुबह होने वाला यह दिव्य आयोजन श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ता है।

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