बैतूल (शशांक सोनकपुरिया)। Betul Jain Deeksha: एक हाथ में न्याय का तराजू और दूसरी ओर वैराग्य का आंचल—मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक बेहद प्रेरणादायक और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। बैतूल की होनहार बेटी के सामने जीवन के दो बड़े रास्ते थे। एक तरफ अपनी कड़ी मेहनत और लगन से न्यायिक सेवा परीक्षा (जज की परीक्षा) पास कर समाज को न्याय देने का सपना था, जो पूरा होने ही वाला था; तो दूसरी तरफ भगवान महावीर के बताए मोक्ष मार्ग और संयम के पथ पर चलने की आंतरिक पुकार थी। बेटी ने सांसारिक मोह-माया और जज की प्रतिष्ठा को छोड़कर दूसरा यानी संयम का मार्ग चुन लिया है।
अब ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी के नाम से जानी जाने वाली इस बेटी के इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक निर्णय का जश्न बैतूल शहर में किसी राजसी उत्सव से कम नहीं मनाया गया। रविवार को शहर में पाँच दीक्षार्थी बहनों की एक बेहद भव्य और आकर्षक बिनौली निकाली गई, जिसने हर देखने वाले का मन मोह लिया।
इस शोभायात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें विंटेज कारों का शाही काफिला, सजी-धजी बग्घियाँ और राजस्थान के उदयपुर से आए प्रसिद्ध संगीत बैंड की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। जब यह अलौकिक बिनौली बैतूल शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी, तो नजारा देखने लायक था।
बैतूल की होनहार बेटी ने जज बनने का सपना छोड़ चुना जैन दीक्षा का मार्ग।
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एक तरफ जहाँ परिजनों की आँखों में अपनी लाडली को सांसारिक रूप से विदा करने की भावुक नमी थी, वहीं दूसरी ओर आसमान भगवान महावीर के जयकारों से गूंज रहा था और पूरे जैन समाज के चेहरों पर एक गर्व का भाव साफ झलक रहा था। इस धार्मिक आयोजन में जैन समाज के सैकड़ों गणमान्य लोगों ने शिरकत की। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर पाँचों दीक्षार्थी बहनों का आत्मीय स्वागत किया गया।
ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी के इस त्याग और वैराग्य पथ को चुनने के निर्णय ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सच्चा सुख किसी भी पद, प्रतिष्ठा या भौतिक सुख-सुविधा में नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण और संयम के मार्ग पर चलने में निहित है। उनके परिवार ने भी बेटी के इस महान और आध्यात्मिक निर्णय को पूरे गर्व, सम्मान और हँसते हुए स्वीकार किया है।
इस अवसर पर दीक्षा लेने वाली बहनों ने अपने विचार साझा करते हुए संयम और अध्यात्म के महत्व पर प्रकाश डाला, जिससे पूरा पंडाल और उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो गया। बैतूल की इस ऐतिहासिक और अनूठी घटना की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।