MBBS Degree Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में MBBS समेत कई हेल्थकेयर कोर्स की डिग्री दिलाने के नाम पर एजेंसियों के सक्रिय होने का मामला सामने आया है। एक पड़ताल में कुछ एजेंटों ने विदेश से MBBS की डिग्री दिलाने और छात्र को नियमित रूप से कॉलेज न भेजने का दावा किया। वहीं नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, फार्मेसी और पैरामेडिकल कोर्स भी बिना नियमित कॉलेज गए कराने की बात सामने आई है।
MBBS Degree Scam: कुछ एजेंटों ने विदेश से MBBS कराने के लिए 30 से 35 लाख रुपए फीस बताई। वहीं डिस्टेंस मोड के नाम पर 3 से 4 लाख रुपए अतिरिक्त मांगे जाने की बात कही गई। एक एजेंट ने दावा किया कि छात्र को शुरुआत में करीब एक महीने के लिए विदेश जाना होगा और इसके बाद हर साल केवल परीक्षा देने जाना पड़ेगा।
30-35 लाख में MBBS, डिस्टेंस के लिए अतिरिक्त फीस
पड़ताल के दौरान एक एजेंसी से विदेश में MBBS कराने को लेकर संपर्क किया गया। जब पूछा गया कि छात्र को विदेश में रखकर पढ़ाना संभव नहीं है और क्या डिस्टेंस से पढ़ाई हो सकती है, तो एजेंट ने इसके लिए ज्यादा फीस की बात कही।
एजेंट के मुताबिक, रेगुलर MBBS की फीस करीब 30 से 35 लाख रुपए होगी। डिस्टेंस के नाम पर 3 से 4 लाख रुपए अतिरिक्त देने होंगे। एजेंट ने दावा किया कि छात्र को शुरुआत में करीब एक महीने विदेश जाना होगा और उसके बाद हर साल परीक्षा के लिए जाना पड़ेगा।
50 हजार रुपए अतिरिक्त देने पर अटेंडेंस का दावा
एक एजेंसी के प्रमुख ने नेपाल, उज्बेकिस्तान समेत कई देशों की यूनिवर्सिटी से संपर्क होने का दावा किया। जब उनसे पूछा गया कि विदेश में नहीं रहने वाले छात्र की कॉलेज में अटेंडेंस कैसे होगी, तो उन्होंने हर साल करीब 50 हजार रुपए अतिरिक्त देने की बात कही।
एजेंसी प्रमुख के मुताबिक, इस रकम के बदले कॉलेज में छात्र की नियमित उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी एजेंसी कई छात्रों को घर बैठे MBBS की डिग्री दिला चुकी है।
उन्होंने उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और फिलीपींस की यूनिवर्सिटी से भी संपर्क होने का दावा किया। उनके मुताबिक, छात्र को शुरुआत में विदेश जाकर कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी और इसके बाद हर साल परीक्षा के लिए जाना होगा।
नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और फार्मेसी की भी डिग्री का दावा
पड़ताल में यह मामला सिर्फ MBBS तक सीमित नहीं मिला। रायपुर में कुछ सेंटरों पर दूसरे राज्यों की यूनिवर्सिटी से नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, फार्मेसी और पैरामेडिकल कोर्स कराने का दावा किया गया।
कुछ सेंटरों ने 3 से 5 लाख रुपए में बिना नियमित कॉलेज गए डिग्री या डिप्लोमा कराने की बात कही। एक काउंसलिंग सेंटर के संचालक ने कहा कि छात्र घर पर रहकर कोर्स कर सकता है और केवल परीक्षा के समय कॉलेज जाना होगा।
DMLT में भी अटेंडिंग और नॉन-अटेंडिंग का अलग रेट
एक अन्य एजेंट से DMLT कोर्स के बारे में पूछने पर उसने दो तरह की फीस बताई। एजेंट के मुताबिक, दो साल के कोर्स में अटेंडिंग की फीस 50 हजार रुपए सालाना** और नॉन-अटेंडिंग की फीस 65 हजार रुपए सालाना होगी।
एजेंट ने दावा किया कि नॉन-अटेंडिंग कोर्स में छात्र को केवल परीक्षा देने जाना होगा। डिप्लोमा के बाद काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए 10 से 15 हजार रुपए अतिरिक्त लगने की बात भी कही गई।
रायपुर में 100 से ज्यादा सेंटर होने का दावा
पड़ताल के दौरान रायपुर में ऐसे कई सेंटरों की जानकारी सामने आई, जो मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के संस्थानों या यूनिवर्सिटी से जुड़े होने का दावा करते हैं।
इन सेंटरों पर फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, फार्मेसी, पैरामेडिकल और लैब टेक्नीशियन जैसे कोर्स कराने की बात कही जा रही है। कुछ सेंटरों ने 3 से 5 लाख रुपए में बिना नियमित पढ़ाई के डिग्री और डिप्लोमा दिलाने का दावा किया।
एक छात्र ने बताया कि वह छत्तीसगढ़ में रहते हुए मध्यप्रदेश की एक यूनिवर्सिटी से BPT कर रहा है। छात्र के मुताबिक, वह करीब 75 हजार रुपए सालाना फीस देता है, लेकिन नियमित रूप से कॉलेज नहीं जाता।
करियर काउंसलिंग के नाम पर छात्रों तक पहुंच रहा नेटवर्क
रायपुर के VIP चौक, शंकर नगर और पंडरी समेत कई इलाकों में ऐसे काउंसलिंग सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आई है। कुछ सेंटर व्यावसायिक परिसरों में भी चल रहे हैं।
मोबाइल मैसेज और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए छात्रों और उनके अभिभावकों तक पहुंच बनाई जा रही है। कुछ एजेंसियां स्कूल और कॉलेजों में भी प्रचार करने जाती हैं। विदेश में एडमिशन कराने पर एजेंटों को कमीशन मिलने की बात भी सामने आई।
कुछ एजेंसियों ने डिस्टेंस MBBS से किया इनकार
पड़ताल में सभी एजेंसियां डिस्टेंस MBBS कराने का दावा करती हुई नहीं मिलीं। कुछ सेंटरों ने साफ कहा कि MBBS डिस्टेंस मोड से नहीं कराया जा सकता और इसके लिए नियमित पढ़ाई जरूरी है।
बिना ट्रेनिंग डिग्री लेने से मरीजों की सुरक्षा पर खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, फार्मेसी और अन्य हेल्थकेयर कोर्स में केवल डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। छात्रों के लिए प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग भी जरूरी होती है।
बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के हेल्थकेयर क्षेत्र में काम करने से मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों ने फिजियोथेरेपी जैसे कोर्स में निर्धारित शैक्षणिक और प्रशिक्षण मानकों का पालन जरूरी बताया है।
मंत्री ने कहा- घर बैठे डॉक्टर की डिग्री के झांसे में न आएं
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने लोगों से ऐसे दावों से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विदेश से पढ़ाई करके आने वाले छात्रों के लिए परीक्षा और इंटर्नशिप की व्यवस्था चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए की गई है। अभिभावकों को घर बैठे डॉक्टर की डिग्री दिलाने के दावों के झांसे में नहीं आना चाहिए।
MBBS Degree Scam: फर्जी दावा मिले तो FIR कराएं
MBBS Degree Scam: चिकित्सा शिक्षा आयुक्त रितेश अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कोर्स के लिए नियम और दिशा-निर्देश तय हैं। यदि कोई संस्थान या एजेंसी फर्जी दावा करती है, तो उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई जानी चाहिए।





