Monday, September 28, 2026
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M.P News : बुरहानपुर- झोपड़ी में सिमटी पढ़ाई, बोमल्यापाट के बच्चों का भविष्य संकट में, क्या यही है नया भारत?

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  नेपानगर क्षेत्र के आदिवासी बहुल बोमल्यापाट फाल्या में शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर बेहद चिंताजनक है। यहां करीब 60 बच्चे एक अस्थायी झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। न तो पक्का स्कूल भवन है, न नियमित शिक्षक और न ही गांव तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क सुविधा।सरकारी दस्तावेजों में गांव को योजनाओं से आच्छादित बताया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है।

छात्रा बनी बच्चों की शिक्षिका

स्थिति इतनी विकट है कि कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली सीमा बडोले छोटे बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्हें स्थानीय स्तर पर ₹3000 प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है, जिससे किसी तरह पढ़ाई जारी रह सके।बच्चे झोपड़ी के भीतर जमीन पर कपड़ा बिछाकर बैठते हैं। बरसात में कीचड़ और गर्मी में तेज तपन के बीच पढ़ाई करना उनके लिए रोज की चुनौती है।

संसाधनों की कमी, बढ़ती चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि यहां लंबे समय से पक्का स्कूल भवन, स्थायी शिक्षक और सड़क की मांग की जा रही है। युवाओं का मानना है कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिए बार-बार मांग उठाना विकास के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

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प्रशासन का आश्वासन

मामले में स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यदि संबंधित योजना में क्षेत्र शामिल नहीं है तो प्रस्ताव तैयार कर आगे भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग द्वारा सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा भी दिया गया है।हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक बच्चे अस्थायी व्यवस्था में पढ़ते रहेंगे?

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भविष्य को लेकर बड़े सवाल

बोमल्यापाट के बच्चों की स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा अब भी प्राथमिकता नहीं बन पाई है? क्या योजनाओं के दावे जमीन पर उतर पाए हैं?

यह मामला केवल एक गांव का नहीं, बल्कि दूरदराज इलाकों में शिक्षा ढांचे की चुनौतियों को उजागर करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासनिक आश्वासन कब वास्तविक बदलाव में बदलते हैं।

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