Wednesday, September 2, 2026
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ED Raid: MP में पूर्व कांग्रेस विधायक संजय शर्मा के ठिकानों पर ED की दबिश, NHAI टोल फर्जीवाड़े से जुड़ा है मामला

MP Toll Plaza Fake Receipt Scam: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्यप्रदेश में NHAI के टोल प्लाजा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। एजेंसी की टीमें MP Toll Plaza Fake Receipt Scam की जांच के तहत बुधवार को मध्यप्रदेश समेत देश के 14 राज्यों में कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी ले रही हैं।मध्यप्रदेश में इस कार्रवाई का संबंध नरसिंहपुर-छिंदवाड़ा नेशनल हाईवे पर होने वाली टोल वसूली से बताया जा रहा है। जांच के दायरे में पूर्व कांग्रेस विधायक संजय शर्मा से जुड़ी कंपनी की कथित भूमिका भी है।

ED की टीम ने पूर्व विधायक संजय शर्मा से संबंधित तीन स्थानों पर तलाशी ली है। इनमें नरसिंहपुर-छिंदवाड़ा हाईवे से जुड़े ठिकानों के अलावा तेंदूखेड़ा और देवरी स्थित कार्यालय भी शामिल बताए जा रहे हैं।टोल फर्जी रसीद घोटाला मामले में अधिकारियों की टीम कार्यालयों में रखे दस्तावेजों के साथ कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है।जांच का फोकस कथित टोल फर्जीवाड़े से जुड़े पैसों के लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड पर भी है। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि टोल वसूली से संबंधित रकम का प्रवाह किस तरह हुआ।

अनधिकृत सॉफ्टवेयर से रसीद बनाने का आरोप
ED की जांच में एक अहम बिंदु कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अनधिकृत सॉफ्टवेयर से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार, टोल वसूली के दौरान अधिकृत सिस्टम के बजाय एक अलग सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन का इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं।आरोप है कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसी टोल रसीदें तैयार की गईं, जिनकी जानकारी NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज नहीं हुई।MP Toll Plaza Fake Receipt Scam में अब ED इस बात की जांच कर रही है कि अगर आधिकारिक सिस्टम से बाहर कोई रकम रखी गई थी, तो उसकी कुल राशि कितनी थी और कथित तौर पर उसका फायदा किन लोगों तक पहुंचा।
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फोरेंसिक जांच में क्या सामने आया?
जांच एजेंसी के मुताबिक, फोरेंसिक जांच और NHAI के उपलब्ध रिकॉर्ड की पड़ताल के दौरान अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़े संकेत मिले हैं।इसी आधार पर ED अब कंप्यूटर सिस्टम, डिजिटल डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को खंगाल रही है। एजेंसी कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम और उससे जुड़े लाभार्थियों की जानकारी जुटाने में भी लगी है।टोल फर्जी रसीद घोटाला सिर्फ रसीदों की जांच तक सीमित नहीं है। ED का फोकस कथित रकम के डायवर्जन और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने पर भी है।

14 राज्यों में एक साथ ED का सर्च ऑपरेशन
यह कार्रवाई ED के लखनऊ जोनल कार्यालय के नेतृत्व में कई राज्यों में एक साथ की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्यप्रदेश, NCR और कोलकाता समेत कई स्थानों पर एजेंसी की टीमें तलाशी ले रही हैं।यानी MP Toll Plaza Fake Receipt Scam की जांच का दायरा केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में जुड़े संभावित ठिकानों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।

PMLA के तहत चल रही जांच
ED की यह कार्रवाई PMLA की धारा 17 के तहत की जा रही है। जांच का आधार 22 जनवरी 2025 को दर्ज FIR संख्या 17 और 19 मई 2025 को दर्ज ECIR संख्या ECIR/ASZO/04/2025 को बनाया गया है।एजेंसी की जांच फिलहाल कथित टोल फर्जीवाड़े, अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल, रकम के डायवर्जन और इससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर केंद्रित है।

अब इन सवालों के जवाब तलाश रही ED
जांच के आगे बढ़ने के साथ ED मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ, कितनी टोल रसीदें इससे प्रभावित हुईं और आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रहने वाली रकम कितनी थी।इसके साथ ही एजेंसी यह भी जांच रही है कि कथित तौर पर इस रकम से किसे लाभ मिला और इसके पीछे कोई संगठित वित्तीय नेटवर्क था या नहीं।फिलहाल तलाशी और जांच जारी है। MP Toll Plaza Fake Receipt Scam से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति ED की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

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