शाजापुर। Nishaanebaz.com-Shajapur Jan Sunwai News: मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब पारिवारिक विवाद और प्रशासनिक सुनवाई न होने से तंग आ चुके एक पीड़ित युवक ने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलकर आत्मदाह करने की कोशिश की। गनीमत यह रही कि मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों ने अदम्य साहस और तत्परता दिखाते हुए युवक के हाथ से ऐन वक्त पर माचिस छीन ली, जिससे एक बेहद बड़ा हादसा होने से टल गया। घटना के तुरंत बाद प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर पहुंची अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) ने पीड़ित से बातचीत कर मामले की जानकारी ली और उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय भिजवा दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक की पहचान ग्राम गिरवर निवासी दुर्गेश मालवीय के रूप में हुई है। पीड़ित के जनसुनवाई आवेदन के मुताबिक, उसके दिवंगत पिता मांगीलाल के नाम पर गांव में शासकीय पट्टे की भूमि स्थित है, जिस पर पहले से दो कमरों का एक कच्चा मकान बना हुआ है। पीड़ित का आरोप है कि बीते होली के त्योहार पर जब वह इस कच्चे मकान को तोड़कर पक्का निर्माण कराने की तैयारी कर रहा था, तभी उसकी बुआ पारूबाई और उनके बेटे भेरूलाल ने इस काम में अड़ंगा डालते हुए विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि दोनों आरोपी उसे मकान का निर्माण नहीं करने दे रहे हैं और दीवार गिराने के दौरान उसे जान से मारने की धमकियां भी दी जा रही हैं।
पीड़ित दुर्गेश का कहना है कि इस पारिवारिक और जमीनी विवाद को लेकर वह पहले भी कई बार प्रशासनिक चौखट पर गुहार लगा चुका है। उसके अनुसार, वह अपनी इस समस्या को लेकर तीन बार जनसुनवाई में लिखित शिकायत दर्ज करा चुका है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला और धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं, घटना से दो दिन पहले बुआ और उनके बेटे द्वारा उसके साथ मारपीट भी की गई थी, जिसकी शिकायत उसने लालघाटी थाने में आवेदन देकर की थी, मगर पुलिस प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
लगातार हो रही प्रशासनिक अनदेखी और पुलिस की निष्क्रियता से क्षुब्ध होकर आखिरकार युवक ने कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह जैसा खौफनाक कदम उठाने का प्रयास किया। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम तुरंत मौके पर पहुंचीं और पीड़ित की पीड़ा सुनकर उसे निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का पूरा आश्वासन दिया। इसके बाद पीड़ित को पुलिस अधीक्षक कार्यालय भिजवाया गया है, ताकि मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकें।