Wednesday, August 19, 2026
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NGT Water Quality Order MP : NGT का ‘वाटर स्ट्राइक’: मध्यप्रदेश के सभी शहरों में दूषित पानी पर कड़ा प्रहार, कलेक्टरों को 14 सूत्रीय सख्त आदेश

NGT Water Quality Order MP : भोपाल। मध्यप्रदेश में दूषित पेयजल की गंभीर समस्या पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की भोपाल बेंच ने एक क्रांतिकारी आदेश जारी किया है। याचिकाकर्ता कमल कुमार राठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने साफ किया है कि नागरिकों को स्वच्छ पानी देना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

अधिवक्ता के तर्कों ने हिलाया प्रशासन: वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने न्यायालय में चौंकाने वाले तथ्य पेश किए। उन्होंने बताया कि भोपाल के तालाबों में फेकल कोलीफॉर्म (मल के जीवाणु) की मात्रा 1600 मिली के खतरनाक स्तर पर पहुँच गई है। सीवेज लाइनें पेयजल पाइपलाइनों में मिलकर जहर घोल रही हैं। अधिवक्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए NGT ने इसे ‘अनुच्छेद 21’ (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन माना।

IIT इंदौर और CPCB की हाई-लेवल कमेटी गठित: NGT ने मामले की वास्तविकता जानने के लिए एक 6-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई है। इसमें IIT इंदौर के विशेषज्ञ और CPCB के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो 6 हफ्तों में राज्य भर के पानी की गुणवत्ता पर रिपोर्ट सौंपेंगे।

कलेक्टरों और निगमायुक्तों को 14-सूत्रीय सख्त निर्देश: ट्रिब्यूनल ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को निम्नलिखित व्यवस्थाएं तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं:

  1. शहर से बाहर होंगी डेयरियां: शहर की सीमा के भीतर 2 से अधिक पशुओं वाली डेयरियों को 4 माह में बाहर शिफ्ट करना होगा।

  2. वॉटर ऐप और मीटरिंग: एक ’24×7 वॉटर ऐप’ बनेगा जहाँ पानी की गुणवत्ता और सप्लाई की जानकारी होगी। हर कनेक्शन पर मीटर अनिवार्य होगा।

  3. निर्माण कार्यों पर रोक: मार्च से जुलाई के दौरान पानी की कमी को देखते हुए निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा।

  4. GIS मैपिंग: पेयजल और सीवेज लाइनों की डिजिटल मैपिंग होगी ताकि लीकेज और मिश्रण का पता चल सके।

  5. मूर्त विसर्जन पर रोक: किसी भी पेयजल स्रोत (डैम या तालाब) में मूर्ति विसर्जन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

  6. वॉटर हार्वेस्टिंग: पालन न करने वाले सरकारी और निजी भवनों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।

बिल में देनी होगी गुणवत्ता की जानकारी: कोर्ट ने केंद्र सरकार की ‘ड्रिंकिंग फ्रॉम टैप’ गाइडलाइन का पालन अनिवार्य कर दिया है। अब स्थानीय निकायों को पानी के बिल के साथ उसकी शुद्धता की रिपोर्ट भी नागरिकों को उपलब्ध करानी होगी।

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