Betul Government School Controversy: स्कूल टाइम में बच्चों के साथ गरबा खेलते नजर आए शिक्षक, पढ़ाई छोड़कर ठुमके लगाने पर गरमाई सियासत

VIKASH KHALKHO

बैतूल। Nishaanebaz.com-Betul School Garba Controversy: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता हुआ एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के ढोंडवाड़ा शासकीय स्कूल में स्कूल के समय के दौरान पढ़ाई कराने की बजाय शिक्षक और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में गरबा खेलते नजर आए। इसका वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या नवरात्रि के उत्साह में बच्चों की पढ़ाई से इस तरह समझौता करना जायज है?

क्या है पूरा मामला और कैसे गरमाया विवाद

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ढोंडवाड़ा शासकीय स्कूल में शिक्षण कार्य के दौरान साउंड बॉक्स पर जोर-शोर से गरबा बजाया गया। स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों की मौजूदगी में बच्चे और खुद शिक्षक पारंपरिक वेशभूषा में गरबा के ठुमके लगाते दिखे। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पहले से ही पठन-पाठन की स्थिति कमजोर है, ऐसे में इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों का कीमती समय और पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है।

बीईओ ने प्रिंसिपल से मांगा स्पष्टीकरण, नियमों की उड़ी धज्जियां

मामले को तूल पकड़ते देख संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने त्वरित संज्ञान लेते हुए स्कूल की प्राचार्य मीना गंगारे से स्पष्टीकरण तलब किया है। बीईओ आर. के. पाटिल ने कहा है कि स्पष्टीकरण मिलने के बाद नियमों के तहत आगामी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग के स्पष्ट नियम हैं कि विद्यालयीन समय में शैक्षणिक गतिविधियां सर्वोपरि होती हैं। यदि किसी प्रकार का सांस्कृतिक कार्यक्रम या उत्सव आयोजित किया जाना है, तो उसके लिए जिला प्रशासन या विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना अनुमति के स्कूल परिसर को उत्सव स्थल में तब्दील करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

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ग्रामीणों और छात्रों ने उठाए गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय लोगों और छात्रों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सरपंच पति अनिल खाड़े और छात्र जय सातनकर ने इस तरह की गतिविधियों पर असंतोष जताया है। वहीं दूसरी ओर, पीटी टीचर आशा अरोरा, अकाउंटेंट के. सी. पंवार, प्राचार्य मीना गंगारे और बीईओ आर. के. पाटिल के पक्ष और बयानों को भी इस पूरे मामले में शामिल किया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग द्वारा मांगा गया स्पष्टीकरण केवल कागजी खानापूर्ति साबित होता है या इस पर कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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