Kho-Kho Selection Controversy : रीवा: मध्य प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को निखारने के सरकारी दावों के बीच रीवा से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ शासन द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता के लिए जिला स्तरीय चयन प्रक्रिया में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आक्रोशित खिलाड़ियों का कहना है कि उनकी योग्यता और अनुभव को नजरअंदाज कर खेल अधिकारियों ने अपने चहेतों और कथित तौर पर पैसे देने वाले युवाओं को टीम में जगह दी है।
सोमवार को करीब एक दर्जन से अधिक पीड़ित खिलाड़ी रीवा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पुलिस को सौंपे लिखित आवेदन में आरोप लगाया कि वे पूरी तरह फिट और अनुभवी हैं, इसके बावजूद उन्हें बिना किसी ठोस कारण के टीम से बाहर कर दिया गया। खिलाड़ियों का दावा है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और अनुभवी टैलेंट की जगह उन लोगों को चुना गया जिनकी सेटिंग अधिकारियों से थी।
इस पूरे मामले पर रीवा के संभागीय खेल और युवा कल्याण अधिकारी एम.के. धोलपुरी ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। धोलपुरी ने संबंधित अधिकारियों से एक दिन के भीतर प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तलब किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश में जहाँ एक ओर सरकार ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों के जरिए ग्रामीण और शहरी युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है, वहीं रीवा में खेल अधिकारियों पर लगे ये आरोप व्यवस्था की साख पर सवालिया निशान खड़ा करते हैं। अब देखना होगा कि विभाग की जांच में पीड़ित खिलाड़ियों को न्याय मिल पाता है या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।











