Kawardha News: कवर्धा। छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड निरस्तीकरण को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व खाद्य मंत्री मोहम्मद अकबर ने रायपुर की सुभाष नगर निवासी साकरा बानो का मामला उठाते हुए आरोप लगाया है कि एक जीवित महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया, जिसके चलते उनका अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया।
उन्होंने इस मामले में तत्काल कार्ड बहाल करने, निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। अकबर ने दावा किया कि उनके पास इस मामले से जुड़े दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य हैं। उनका कहना है कि किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उसका राशन कार्ड निरस्त करना गंभीर प्रशासनिक चूक है, जिससे जरूरतमंद परिवार खाद्य सुरक्षा के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
Kawardha News: दो साल में 1.17 लाख से ज्यादा राशन कार्ड हुए निरस्त
पूर्व खाद्य मंत्री ने राशन कार्ड निरस्तीकरण के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, लोकसभा में 22 जुलाई 2026 को दिए गए जवाब के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 57,371 और वर्ष 2025 में 60,496 राशन कार्ड निरस्त किए गए। यानी दो वर्षों में कुल 1,17,867 राशन कार्ड रद्द हुए। उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े स्तर पर कार्ड निरस्त करने के लिए क्या मानदंड अपनाए गए, क्या हर मामले में सही तरीके से सत्यापन किया गया और प्रभावित परिवारों को पहले सूचना देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था या नहीं।
प्रदेश में 83.33 लाख राशन कार्ड, 2.74 करोड़ सदस्य
अकबर ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 83.33 लाख राशन कार्ड प्रचलन में हैं और इनमें 2.74 करोड़ से अधिक सदस्य पंजीकृत हैं। वर्ष 2025 की अनुमानित 3.08 करोड़ आबादी के आधार पर उन्होंने प्रदेश में पीडीएस कवरेज करीब 89 प्रतिशत बताया। उनका कहना है कि यदि कवरेज अभी भी शत-प्रतिशत नहीं है, तो सरकार को पात्र परिवारों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाने के लिए और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
Kawardha News: खाद्य मंत्री से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
साकरा बानो के मामले को उठाते हुए मोहम्मद अकबर ने मौजूदा खाद्य मंत्री से महिला का अंत्योदय राशन कार्ड तुरंत बहाल करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रदेशभर में निरस्त किए गए राशन कार्डों की समीक्षा कराने की भी मांग की, ताकि यह पता चल सके कि कहीं रिकॉर्ड की त्रुटियों के कारण अन्य पात्र परिवार भी राशन के अधिकार से वंचित तो नहीं हुए।
Kawardha News: सरकारी पक्ष का इंतजार
Kawardha News: फिलहाल, साकरा बानो के मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में जांच पूरी होने और सरकारी रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राशन कार्ड निरस्तीकरण में किस स्तर पर चूक हुई। हालांकि, इस मामले ने प्रदेश में राशन कार्ड सत्यापन और निरस्तीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।