नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले की जांच कर रही समिति में वकील करण उमेश साल्वी को सलाहकार नियुक्त किया है। यह समिति ‘न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968’ के तहत गठित की गई है और फिलहाल वर्मा के सरकारी आवास से मिले अकूत नकदी के मामले की जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज और इलाहाबाद हाई कोर्ट में बिना न्यायिक जिम्मेदारी के तैनात जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आगजनी की घटना के दौरान भारी मात्रा में नकदी मिली थी। इस घटना ने न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और सीनियर एडवोकेट बी.वी. आचार्य शामिल हैं। अब वकील करण उमेश साल्वी इस समिति में कानूनी शोध, कार्यवाही समन्वय और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में सहयोग करेंगे।
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साल्वी इस जांच प्रक्रिया में नियुक्त किए गए तीसरे सलाहकार वकील हैं। इससे पहले स्पीकर ओम बिरला ने वकील रोहन सिंह और समीक्षा दुआ को समिति के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया था। समिति को अब जांच के विभिन्न पहलुओं पर कानूनी विशेषज्ञता मिलेगी, जिससे रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका को खारिज करते हुए जांच प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “समय पर एक टांका लगाओ तो नौ बच जाते हैं,” यानी शुरुआती स्तर पर सुधार न करने से हालात और गंभीर हो गए हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने 12 अगस्त को जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। समिति की जांच रिपोर्ट लोकसभा में पेश की जाएगी। यदि रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होती है, तो जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। यह मामला न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर अब एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।











