Tuesday, August 18, 2026
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Jashpur Jansampark Scandal : जशपुर ‘जनसंपर्क कांड’ : जब कलम की धार से घबराई अफसरशाही, अधिकारी ने खुद को ‘जज’ मान पत्रकार को घोषित किया अपराधी

Jashpur Jansampark Scandal : गौरी शंकर गुप्ता/जशपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में इन दिनों ‘सुशासन’ की परिभाषा बदलती नजर आ रही है। जिला जनसंपर्क कार्यालय की एक महिला अधिकारी की कार्यशैली ने न केवल एक दलित कर्मचारी को आत्महत्या की दहलीज पर धकेला, बल्कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले एक स्वतंत्र पत्रकार को सार्वजनिक रूप से ‘अपराधी’ लिखकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार किया है।

1. शोषण की पराकाष्ठा: ₹4,600 में ‘गुलामी’ का आरोप

विवाद की शुरुआत सफाईकर्मी रविन्द्रनाथ राम की प्रताड़ना से हुई। आरोप है कि सहायक संचालक नूतन सिदार उससे सफाई के साथ-साथ फोटोग्राफी, ड्राइविंग और कंप्यूटर संचालन जैसे तकनीकी काम लेती थीं। इतना ही नहीं, कर्मचारी ने लिखित आरोप लगाया है कि उससे अधिकारी के घर के निजी काम जैसे बर्तन मांजना और झाड़ू-पोछा भी करवाया जाता था। विरोध करने पर उसे एससी/एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी गई, जिससे तंग आकर उसने 13 अगस्त 2025 को जहर खाकर जान देने की कोशिश की।

2. जब अधिकारी बनीं ‘जज’: पत्रकार को लिखा ‘क्रिमिनल’

जब स्वतंत्र पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने इस मानवीय शोषण और विभाग में हो रहे कथित ‘फर्जी वेतन आहरण’ के खेल को उजागर किया, तो अधिकारी ने मर्यादाओं की सीमा लांघ दी। 2 सितंबर 2025 को पुलिस को लिखे पत्र में अधिकारी ने बिना किसी कानूनी आधार के पत्रकार को दो बार “अपराधी” (Criminal) संबोधित किया। यही नहीं, इस अपमानजनक पत्र को कलेक्टर के ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में साझा कर पत्रकार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई गई।

3. ‘VIP डाक सेवा’ और करोड़ों का कानूनी युद्ध

मामले में तब एक नया मोड़ आया जब पता चला कि अधिकारी की शिकायत भेजने के लिए रायगढ़ डाकघर को नियमों के विपरीत रात 8:25 बजे खुलवाया गया। पत्रकार को डराने के लिए 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया, जिसके पलटवार में पत्रकार ने भी 50 लाख रुपये का हर्जाना और माफीनामा मांगा है।

4. PMO की चौखट पर न्याय की गुहार

स्थानीय प्रशासन और पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी के बाद अब यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहुँच गया है। पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा की शिकायत (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2025/0229404) को PMO ने स्वीकार कर लिया है और यह वर्तमान में ‘अंडर प्रोसेस’ है। मांग की गई है कि सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन पर अधिकारी को तत्काल बर्खास्त कर उन पर FIR दर्ज की जाए।

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