जबलपुर, देबजीत देब। न्यायिक राजधानी जबलपुर से एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय ठगी का मामला उजागर हुआ है, जिसमें कनाडा की कंपनी क्रिस्टल माईन्ड ने जबलपुर स्थित एम. जी. वेल्स सॉल्यूशन और इसके दो अधिकारियों—रविन्द्र सिंह बावा (डायरेक्टर) और ई. डी. मूर्ति (सेल्स मैनेजर)—पर 53 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
कंपनी के मालिक मुराद फाहिम द्वारा जिला न्यायालय में दायर परिवाद के अनुसार, भारत में व्यापार विस्तार के लिए उन्होंने जबलपुर की फर्म के साथ स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई को लेकर कुल 90,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹75 लाख) की डील की थी। दो किस्तों में पहले 45,000 डॉलर (₹37.57 लाख) और फिर 18,500 डॉलर (₹15.45 लाख) भेजे गए, लेकिन न तो माल मिला, न ही राशि की वापसी हुई।
इतना ही नहीं, आरोप है कि एम. जी. वेल्स के सेल्स मैनेजर ई. डी. मूर्ति ने क्रिस्टल माईन्ड की अधिकृत मुहर और नाम का दुरुपयोग कर जिंदल ड्रिलिंग को फर्जी इनवॉइस भेजी थी, जो न्यायालय की दृष्टि में “मूल्यवान दस्तावेज की जालसाजी” की श्रेणी में आता है।
जज देवरथ सिंह ने इस मामले को सिर्फ एक व्यावसायिक विवाद नहीं बल्कि धोखाधड़ी, विश्वासघात और दस्तावेजों की जालसाजी मानते हुए आईपीसी की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत संज्ञान लिया है। डायरेक्टर रविन्द्र सिंह बावा पर IPC की धारा 420, 418 और 409 तथा ई. डी. मूर्ति पर धारा 467, 468, 469, 472, 475 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
कोर्ट ने इस मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता नहीं मानी और सीधे ट्रायल की प्रक्रिया अपनाने का आदेश दिया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तारी के बजाय समन जारी कर 30 जुलाई 2025 को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। समन प्रक्रिया मुराद फाहिम द्वारा निर्धारित समय सीमा में शुल्क और दस्तावेज प्रस्तुत करने पर प्रारंभ होगी।
इस प्रकरण ने भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साख पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है, लेकिन जबलपुर कोर्ट द्वारा इस मामले को गंभीरता से लिया जाना दर्शाता है कि भारतीय न्याय व्यवस्था ईमानदार और पारदर्शी व्यापार की रक्षा हेतु प्रतिबद्ध है।











