Wednesday, August 19, 2026
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Jabalpur High Court Ethanol Plant : एथेनॉल प्लांट पर हाईकोर्ट की गाज: प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन पर सरकार और PCB को थमाया नोटिस

Jabalpur High Court Ethanol Plant : जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जबलपुर जिले के शाहपुरा तहसील स्थित एक एथेनॉल प्लांट के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने पर्यावरण नियमों के कथित उल्लंघन और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

अधिवक्ता अमर गुप्ता द्वारा दायर इस याचिका में शाहपुरा के ग्राम नटवारा में स्थित मेसर्स श्री बालाजी बायो सॉल्यूशन फ्यूल्स एलएलपी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका के अनुसार, यह प्लांट पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण अधिनियम 1974 की धज्जियां उड़ा रहा है। आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला अपशिष्ट और बिना उपचारित (Untreated) गंदा पानी सीधे खेतों और स्थानीय जलस्रोतों में बहाया जा रहा है, जिससे न केवल खेती बर्बाद हो रही है बल्कि भूजल भी जहरीला हो गया है।

प्लांट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए याचिका में कहा गया है कि वायु और ध्वनि प्रदूषण के कारण ग्रामीणों को सांस लेने में दिक्कत और अन्य बीमारियां हो रही हैं। गौरतलब है कि यह औद्योगिक इकाई पहले से ही विवादों के घेरे में है। हाल ही में भाजपा विधायक नीरज सिंह ने इस प्लांट पर 400 क्विंटल चावल की हेराफेरी और सरकारी बोरियों को बदलकर निजी ट्रकों से ढुलाई करने के संगीन आरोप लगाए थे। जांच के दौरान नायब तहसीलदार को फैक्ट्री में प्रवेश न देने के मामले ने भी काफी तूल पकड़ा था।

हाईकोर्ट के जस्टिस की बेंच ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता। इस नोटिस के बाद जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब उन्हें कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश कर यह बताना होगा कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद प्लांट के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

“फैक्ट्री प्रबंधन नियमों को ताक पर रखकर जहरीला कचरा खुले में छोड़ रहा है। हमने साक्ष्यों के साथ माननीय न्यायालय को अवगत कराया है कि कैसे यह प्लांट नटवारा और आसपास के गांवों के लिए अभिशाप बन गया है। हमें उम्मीद है कि कोर्ट सख्त आदेश पारित करेगा।” — अमर गुप्ता, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय

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