IPS Ratanlal Dangi: IPS रतनलाल डांगी यौन उत्पीड़न मामला: प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आरोप पत्र जारी, IPS पारुल माथुर रखेंगी पक्ष

Sanjay Sahu
IPS Ratanlal Dangi

IPS Ratanlal Dangi: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में आरोप पत्र जारी किया गया है। डीजीपी ने हाईकोर्ट को बताया कि प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। वहीं, पीड़िता की आपत्ति के बाद मामले में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में IPS प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला IPS अधिकारी पारुल माथुर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा ADG दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है।

पीड़िता ने जांच में पक्षपात का लगाया था आरोप

मामले में पुलिस विभाग में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने IPS रतनलाल डांगी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि पिछले सात वर्षों से उसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। हालांकि, रतनलाल डांगी ने इन आरोपों को झूठा बताया था।

प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पीड़िता ने पक्षपात का आरोप लगाया था। उसने आशंका जताई थी कि आरोपी अधिकारी को बचाने की कोशिश की जा रही है। पीड़िता ने मामले में महिला अधिकारी से जांच कराने की मांग भी की थी।

प्रशांत अग्रवाल की जगह पारुल माथुर को मिली जिम्मेदारी

पीड़िता की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद गृह सचिव ने प्रस्तुतकर्ता अधिकारी IPS प्रशांत अग्रवाल को बदल दिया। उनकी जगह IPS पारुल माथुर को जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं, ADG दीपांशु काबरा को मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

पीड़िता की मांग थी कि महिला अपराध से जुड़े संवेदनशील मामले में महिला अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए। इसी मुद्दे पर पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद अदालत ने राज्य शासन के गृह सचिव और डीजीपी से जवाब मांगा था।

डीजीपी के जवाब के बाद हाईकोर्ट में मामला निराकृत

IPS Ratanlal Dangi: पीड़िता के वकील अभिषेक पांडेय के अनुसार, 14 अक्टूबर को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान डीजीपी ने अदालत को बताया कि प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद निलंबित IPS रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया है। साथ ही जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई। गृह सचिव और डीजीपी के जवाब से संतुष्ट होने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। मामले में आगे की विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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