Friday, August 28, 2026
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Indore High Court : इंदौर भागीरथपुरा मामला: हाईकोर्ट ने डेथ ऑडिट रिपोर्ट को बताया गुमराह करने वाला, शासन को लगी फटकार

Indore High Court : इन्दौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से हुई मौतों के मामले में मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने शासन और नगर निगम द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्टों पर अत्यंत गंभीर टिप्पणियां करते हुए उन्हें ‘अस्पष्ट और गुमराह करने वाला’ करार दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय बागड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट ने शासन की ‘डेथ ऑडिट रिपोर्ट’ पर कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्ट में मौतों के कारणों को स्पष्ट रूप से न बताते हुए ‘वॉटर बॉर्न डिज़ीज़’ जैसे संदिग्ध शब्दों का उपयोग किया गया था, जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई। कई मामलों में मौतों का कारण ‘जानकारी नहीं’ बताए जाने को भी अदालत ने प्रशासन की विफलता माना।

सुनवाई के दौरान नगर निगम की दलीलें भी कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सकीं। निगम ने दावा किया कि क्षेत्र के 18 बोरवेल बंद कर दिए गए हैं, जिस पर कोर्ट ने सवाल किया कि यदि बोरवेल बंद थे, तो दूषित पानी घरों तक कैसे पहुँच रहा था? साथ ही, नगर निगम द्वारा पानी की टेस्टिंग के लिए केवल 8 मानकों (Parameters) का उपयोग करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 34 मानकों पर जांच कर चुका है। पाइपलाइन बदलने के टेंडर में हुई देरी को लेकर भी सवाल खड़े किए गए।

मुआवजे के मुद्दे पर भी विसंगति सामने आई। अधिवक्ता बागड़िया ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने 2 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है जो ‘रेड क्रॉस चैरिटी फंड’ से दिया जा रहा है, जबकि सामान्य दुर्घटनाओं में शासन द्वारा 4 लाख रुपये तक के मुआवजे का प्रावधान है। पूरी बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब सबकी निगाहें कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे प्रशासन की जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।

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