इंदौर : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज को बड़ी राहत देते हुए कलेक्टर द्वारा पारित आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया कलेक्टर की कार्यवाही को संदिग्ध मानते हुए उसके प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकार क्षेत्र को लेकर उठे गंभीर सवाल
कॉलेज की ओर से दायर याचिका में यह तर्क दिया गया कि संस्था मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 181 और 182 के अंतर्गत भूमिस्वामी की श्रेणी में नहीं आती। इसके बावजूद कलेक्टर द्वारा आदेश पारित किया गया, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर प्रतीत होता है। हाईकोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक सीमा के उल्लंघन की आशंका जताई।
आदेश की तारीख ने बढ़ाई परेशानी
मामले में सबसे अहम और चौंकाने वाला पहलू आदेश की तारीख को लेकर सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार यह प्रकरण कलेक्टर के समक्ष 23 जनवरी 2026 को अंतिम आदेश के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन आदेश 12 जनवरी 2026 को ही पारित कर दिया गया। इससे न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यथास्थिति आदेश को निष्प्रभावी करने का आरोप
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि 19 जनवरी 2026 को अतिरिक्त आयुक्त द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए गए थे। आशंका जताई गई कि कलेक्टर का आदेश इन निर्देशों को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से एंटी-डेटेड किया गया हो सकता है।
अगली सुनवाई तक यथास्थिति बरकरार
हाईकोर्ट ने फिलहाल कलेक्टर के आदेश को प्रभावहीन करते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इससे कॉलेज को प्रशासनिक कार्रवाई से अस्थायी राहत मिली है। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट कलेक्टर की भूमिका और आदेश की वैधता पर विस्तार से विचार करेगा।यह मामला न केवल इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज से जुड़ा है, बल्कि यह प्रशासनिक अधिकारों की सीमा और न्यायिक पारदर्शिता से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है।











