दिल्ली। । 22 सितंबर से लागू हुए GST 2.0 ने थोक व्यापारियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नई दरों और बदली हुई MRP के कारण ग्राहकों की मांग में बदलाव आया है, लेकिन व्यापारियों के गोदामों में लाखों रुपये का पुराना स्टॉक अटका पड़ा है।
व्यापारियों का कहना है कि उन्हें माल पुराने टैक्स स्लैब पर खरीदना पड़ा था, लेकिन अब वही उत्पाद कम GST दर पर बाजार में बेचना पड़ रहा है। इससे उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
एक डिस्ट्रीब्यूटर ने बताया, “गोदाम में लगभग 10 करोड़ रुपये का स्टॉक पड़ा है। ग्राहक नई दर वाले प्रोडक्ट चाहते हैं, लेकिन कंपनियां कोई राहत नहीं दे रहीं। अब हम किस पर भरोसा करें?”
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इसी तरह, पापड़ और अचार बनाने वाली एक कंपनी का करीब 3-4 करोड़ रुपये का माल थोक व्यापारियों के पास फंसा है। यह स्टॉक पुराने रेट पर खरीदा गया था, जबकि उपभोक्ता नई कीमत पर ही खरीदना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और कंपनियों ने तत्काल राहत नहीं दी, तो बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। डिस्ट्रीब्यूटर्स और थोक व्यापारी सप्लाई चैन की रीढ़ हैं। इनके नुकसान से खुदरा बाजार और उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे।
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व्यापारियों ने मांग की है कि कंपनियां पुराने स्टॉक पर GST का अंतर लौटाएं या अन्य वित्तीय राहत दें, ताकि व्यापार सुचारू रूप से चल सके।













