Friday, August 21, 2026
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Shukracharya Story In Mahakali Movie: केवल ‘असुरों के गुरु’ नहीं थे शुक्राचार्य: ‘महाकाली’ में अक्षय खन्ना निभाएंगे सबसे ज्ञानी रणनीतिकार की भूमिका

मुंबई [Nishanebaaz News]। ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) में ‘रहमान डकैत’ का खौफनाक किरदार निभाकर दर्शकों की दाद बटोरने वाले अभिनेता अक्षय खन्ना अब पर्दे पर एक बिल्कुल नए और पौराणिक अवतार में नजर आने वाले हैं। प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स (PVCU) की आगामी फिल्म ‘महाकाली’ (Mahakali) में अक्षय खन्ना असुरों के महान आचार्य शुक्राचार्य की भूमिका निभाएंगे।

निर्माताओं ने इस फिल्म की पहली झलक 24 अगस्त 2026 को जारी करने की घोषणा की है, जिसे टैगलाइन ‘द एंड बिगिन्स’ (अंत की शुरुआत) के साथ पेश किया गया है। फिल्म में अक्षय खन्ना के साथ रोहित सराफ और भूमि शेट्टी भी मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

रहस्यमयी लुक: लंबी दाढ़ी, बंधी जटाएं और माथे पर तिलक

अक्षय खन्ना का जो नया लुक सामने आया है, उसमें वे लंबी सफेद दाढ़ी, सिर पर बंधी जटाएं, माथे पर भस्म का तिलक और चेहरे पर आध्यात्मिक तेज के साथ नजर आ रहे हैं। पहली नजर में पहचानना मुश्किल है कि यह वही अभिनेता हैं जिन्होंने पर्दे पर गैंगस्टर का किरदार निभाया था। इस बार वे किसी डकैत नहीं, बल्कि सनातन पौराणिक इतिहास के सबसे विद्वान और शक्तिशाली आचार्यों में से एक की भूमिका में हैं।

केवल ‘असुरों के गुरु’ नहीं, महान तपस्वी और रणनीतिकार थे शुक्राचार्य

आमतौर पर नई पीढ़ी शुक्राचार्य को केवल ‘असुरों का गुरु’ मानकर एक खलनायक की तरह देखती है, जबकि पौराणिक ग्रंथों और महाभारत की कथाओं में उनका व्यक्तित्व बेहद प्रखर और सम्मानजनक रहा है:

  • महर्षि भृगु के पुत्र: शुक्राचार्य महर्षि भृगु के पुत्र थे, जिन्हें ‘काव्य’ और ‘उशना’ नाम से भी जाना गया।

  • रणनीति के महारथी: जिस तरह देवताओं के पास देवगुरु बृहस्पति थे, उसी तरह असुरों के पास मार्गदर्शन के लिए शुक्राचार्य थे। देवासुर संग्राम केवल सेनाओं का युद्ध नहीं, बल्कि बृहस्पति और शुक्राचार्य की बुद्धिमत्ता की परीक्षा भी हुआ करता था।

मृत संजीवनी विद्या के ज्ञाता थे शुक्राचार्य

शुक्राचार्य की सबसे बड़ी शक्ति उनकी ‘मृत संजीवनी’ विद्या थी। इस विद्या के प्रभाव से वे युद्ध में मारे गए असुरों को पुनः जीवित कर देते थे।

  1. कच और संजीवनी विद्या: इस विद्या का रहस्य जानने के लिए देवगुरु बृहस्पति के पुत्र कच शुक्राचार्य के आश्रम में शिष्य बनकर पहुंचे थे।

  2. गुरु-शिष्य परंपरा का अध्याय: असुरों द्वारा कच को मारकर उसकी राख शुक्राचार्य को मदिरा में पिला देने के बाद, शुक्राचार्य ने अपने उदर के भीतर से ही कच को संजीवनी विद्या सिखाई। बाहर आने के बाद कच ने उसी विद्या से अपने गुरु को पुनर्जीवित किया था।

राजा बलि को वामन अवतार के समय किया था सावधान

भगवान विष्णु के वामन अवतार प्रसंग में भी शुक्राचार्य की दूरदर्शिता देखने को मिलती है। जब वामन रूप में भगवान विष्णु दानवीर राजा बलि के पास तीन पग भूमि मांगने पहुंचे, तो शुक्राचार्य ने उन्हें तुरंत पहचान लिया था। उन्होंने राजा बलि को संकल्प लेने से रोका और आने वाले संकट के प्रति चेताया था।

‘महाकाली’ में दिखेगी पौराणिक इतिहास की गहराई

सिनेमा प्रेमियों के बीच यह उत्सुकता बनी हुई है कि क्या निर्देशक प्रशांत वर्मा और उनकी टीम फिल्म ‘महाकाली’ में शुक्राचार्य को केवल एक डरावने असुर गुरु के रूप में दिखाएंगे या उस महान तपस्वी, दूरदर्शी और अपने शिष्यों के प्रति समर्पित गुरु के पक्ष को भी सामने लाएंगे। 24 अगस्त को फिल्म का पहला लुक जारी होने के साथ ही इस रहस्य पर से पर्दा उठेगा।

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