गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। Nishaanebaz.com-Raigarh Land Dispute News: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के छतामुड़ा-बांजीपाली हल्का बॉर्डर स्थित नेशनल हाईवे से कांशीराम चौक की ओर जाने वाली करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे और मलबे की पाटन का मामला अब तूल पकड़ चुका है। न्यायालय में मामला पहले से ही विचाराधीन होने के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और मलबे की डंपिंग ने स्थानीय प्रशासनिक अमले की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस बीच, मौके पर पकड़े गए एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इस पूरे भूमि घोटाले के पर्दे के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब कर दिया है और एक रसूखदार ‘सेठ गणेश अग्रवाल’ का नाम सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
सामने आए इस वायरल वीडियो में स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर जब मलबे की अवैध डंपिंग कर रहे एक युवक को घेरा, तो उसने कैमरे के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। काली टी-शर्ट पहने उस युवक ने बेबाक अंदाज में स्वीकार किया कि उसे सेठ ने माल खाली करवाने के लिए कहा है और वह केवल एक नौकर है। युवक ने कैमरे पर स्पष्ट रूप से बताया कि उस सेठ का नाम गणेश अग्रवाल है, जो हांडी चौक के पास के रहने वाले हैं, हालांकि उसने जमीन के असली मालिक या खसरा नंबर की जानकारी न होने की बात कही। यह बयान सीधे तौर पर यह साबित करने के लिए काफी है कि इस अवैध कब्जे के खेल में कोई बड़ा शख्स परदे के पीछे से पूरी पटकथा लिख रहा है और गरीब या छोटे मोहरों का इस्तेमाल कर रहा है।
रायगढ़ में करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला गरमाया, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप; जांच और कार्रवाई पर नजर।
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— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) October 27, 2026
इस पूरे विवाद की यदि गहराई से पड़ताल की जाए तो यह खसरा नंबर 155/2, 155/1ख और शासकीय भूमि 156 से जुड़ा हुआ है। पीड़ित किसान फतेहचंद पटेल द्वारा तहसील कार्यालय में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, एक ही खसरा नंबर को दो अलग-अलग हल्कों में दर्शाकर बेशकीमती शासकीय मद की जमीन पर भी अवैध कब्जा जमाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब पूरा मामला पहले से ही तहसील न्यायालय में विचाराधीन है, तब मौके पर बाउंड्रीवॉल खड़ी करना और मलबा पाटना सीधे तौर पर कानून और न्यायपालिका को खुली चुनौती देने के समान है।
वायरल वीडियो सामने आने के बाद से स्थानीय नागरिकों और किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है, तब इस तरह की मनमानी गतिविधियां आखिर किसकी शह पर संचालित हो रही हैं। क्या स्थानीय प्रशासन और मैदानी अमले की मिलीभगत के बिना इस स्तर का अवैध कब्जा संभव है? अब जनता और पीड़ित पक्षों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि वायरल वीडियो की सत्यता की फोरेंसिक व तकनीकी जांच कराई जाए, वीडियो में लिए गए नाम की भूमिका की गहराई से पड़ताल की जाए, और इस भू-माफिया सिंडिकेट के असली मास्टरमाइंड को बेनकाब कर कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
